जौनपुर में हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद सार्वजनिक भूमि पर दोबारा अतिक्रमण, ग्रामीणों में आक्रोश

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद की केराकत तहसील अंतर्गत ग्राम दुसौरी (टुसौरी) में सार्वजनिक भूमि पर दोबारा अतिक्रमण का गंभीर मामला सामने आया है। यह प्रकरण वर्तमान में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद जमीन पर पुनः कब्जा होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद हुई थी कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार Criminal Revision Defective No. 1782 of 2024 (अभयजीत सिंह व 5 अन्य बनाम राज्य उ0प्र0 व अन्य) में दिनांक 22 मई 2025 को पारित आदेश के अनुपालन में जिलाधिकारी जौनपुर के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने उपजिलाधिकारी केराकत की उपस्थिति में स्थलीय निरीक्षण, सीमांकन और सत्यापन की कार्रवाई की थी।
जांच के दौरान ग्राम दुसौरी स्थित गाटा संख्या 653, 661क, 637, 654, 726 एवं 692 की भूमि को चिन्हित किया गया। यह भूमि ग्राम समाज, भीटा एवं चकमार्ग जैसी सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी में दर्ज है। प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटवाकर सीमा चिन्हित करते हुए पत्थर गाड़े गए थे। साथ ही, दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए विस्तृत आख्या 02 जुलाई 2025 को पत्रांक संख्या 456 के माध्यम से उच्च न्यायालय को प्रेषित की गई थी।
दोबारा अवैध कब्जे का आरोप
अब आरोप है कि आराजी संख्या 726/0.024 हेक्टेयर (नवीन परती) तथा आराजी संख्या 692/0.053 हेक्टेयर (चकमार्ग) पर पुनः अवैध कब्जा कर लिया गया है। शिकायत के अनुसार कुछ लोगों ने दोबारा सार्वजनिक भूमि को अपनी निजी जोत में शामिल कर लिया है, जिससे ग्रामवासियों में रोष फैल गया है।
शिकायतकर्ता जितेन्द्र सिंह पुत्र स्व. श्रीराम सिंह, निवासी ग्राम दुसौरी, जो पूर्व डीआईजी कृपा शंकर सिंह के भाई हैं, ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि संबंधित व्यक्ति दबंग एवं मनबढ़ प्रवृत्ति के हैं और कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हैं।
ग्रामीणों में भय और तनाव का माहौल
ग्रामीणों के अनुसार जब भी सार्वजनिक भूमि पर हो रहे अतिक्रमण का विरोध किया जाता है, तब फौजदारी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इससे गांव में भय और तनाव का वातावरण बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी कब्जा दोबारा हो सकता है, तो आम नागरिक न्याय के लिए कहां जाए?
यह मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। सार्वजनिक उपयोग की भूमि जैसे चकमार्ग और ग्राम समाज की जमीन पर बार-बार अतिक्रमण से विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से की गई शिकायत
शिकायतकर्ता ने जौनपुर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मिलकर मामले की पुनः जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने अपने एवं अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की है।
मामले की प्रतिलिपि आवश्यक कार्रवाई हेतु उपजिलाधिकारी केराकत को भी भेजी गई है। प्रशासनिक स्तर पर जांच की तैयारी की जा रही है, हालांकि अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण: बड़ा सवाल
जौनपुर के केराकत क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि पर बार-बार हो रहे अतिक्रमण ने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह प्रवृत्ति और बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक भूमि संरक्षण के लिए नियमित निगरानी, डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट और स्थानीय स्तर पर सख्त प्रवर्तन आवश्यक है। अन्यथा, न्यायालय के आदेश भी प्रभावहीन साबित हो सकते हैं।







