
जन एक्सप्रेस/ पिथौरागढ़: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी क्षेत्र में कुदरत की मार झेल चुके आपदा प्रभावितों के सब्र का बांध अब टूट गया है। भीषण आपदा को आए एक साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन आज भी कई प्रभावित परिवार बुनियादी हक और छत के लिए तरस रहे हैं। बोना, गोल्फा और झापुली क्षेत्र के कई परिवार आज भी टेंट स्कूलों में रहने को मजबूर हैं। शासन-प्रशासन की इस गंभीर लापरवाही के खिलाफ स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा खोल दिया है।
4 साल बाद भी नहीं मिली मुआवजे की दूसरी किस्त!
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर हीलाहवाली का आरोप लगाते हुए बताया कि सिर्फ हालिया आपदा ही नहीं, बल्कि पुरानी आपदाओं के जख्म भी अभी हरे हैं:
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मालुपाती और धापा क्षेत्र के परिवारों को विस्थापन और राहत की दूसरी किस्त का धन आवंटित हुए चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक यह राशि पीड़ितों के हाथों में नहीं पहुंच पाई है।
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क्षेत्र के कई गांव आज भी अपने सुरक्षित विस्थापन (Rehabilitation) की बाट जोह रहे हैं।
इन गांवों के परिवार विस्थापन के इंतजार में:
धापा, मालुपाती, सुरिघाट, जिमिघाट, कुलथम, बोना, गोल्फा, भदेली, सेरासुराईधार और रीठा।
तहसील मुख्यालय में प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
अपनी सुध न लिए जाने से नाराज आपदा प्रभावित परिवारों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने तहसील मुख्यालय मुनस्यारी में जोरदार प्रदर्शन किया। नारेबाजी और आक्रोश जताने के बाद, तहसीलदार के माध्यम से सूबे के मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी पिथौरागढ़ को एक ज्ञापन भेजा गया, जिसमें सभी लंबित मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की गुहार लगाई गई है।
“15 दिन में समाधान नहीं तो उग्र आंदोलन” – विक्रम दानू
यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि (मदकोट मुनस्यारी) विक्रम दानू ने शासन-प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा:
“यदि दो सप्ताह (15 दिन) के भीतर इन गरीब आपदा प्रभावितों की समस्याओं का ठोस समाधान नहीं किया गया, तो सभी पीड़ित परिवार मिलकर तहसील मुख्यालय मुनस्यारी और जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ में एक विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद कानून-व्यवस्था की जो भी स्थिति बनेगी, उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”
इस मौके पर लक्ष्मण विश्वकर्मा, किशोर प्रहलाद, नरेंद्र, खज्जू हरीश, उदय रमेश सहित दर्जनों पीड़ित ग्रामीण और युवा उपस्थित रहे।






