Lucknow

यूपी में ब्राह्मण विधायकों के सहभोज के बाद सियासत में उबाल:पीएम मोदी से मिले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, बढ़ते कयासों ने तेज की गर्मी

ब्राह्मण विधायकों के सहभोज से शुरू हुआ बवंडर, दिल्ली तक पहुंचा, प्रधानमंत्री ने ली ब्राह्मणों की उपेक्षा की पूरी जानकारी: सूत्र 

जन एक्सप्रेस।लखनऊ/नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश की सियासत इन दिनों सर्द मौसम के बावजूद गर्माती नजर आ रही है। ब्राह्मण विधायकों के सहभोज के बाद शुरु हुआ राजनीतिक घमासान अब राजधानी लखनऊ की सरहदों को लांघकर दिल्ली के सत्ता–गलियारों तक पहुंच गया है। विभिन्न अखबारों सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार चैनलों पर ब्राह्मण समाज की संभावित नाराजगी की खबरें सामने आने के बाद माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पूरे प्रकरण की जानकारी ली है। इसी क्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की प्रधानमंत्री से मुलाकात ने सियासी गलियारों में कयासों का बाजार और गर्म कर दिया है।
संगठनात्मक संतुलन और प्रतिनिधित्व पर चर्चा तेज
सूत्र बताते हैं कि हालिया सहभोज और निरंतर बैठकों के बाद संगठनात्मक संतुलन, जातीय समीकरण और मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है। ब्राह्मण नेताओं का कहना है कि प्रशासनिक तबादलों और पोस्टिंग में पक्षपात के आरोपों ने असंतोष को और गहरा किया है। इसी बीच प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा जारी नोटिस ने आग में घी का काम किया और समाज व संगठनों के भीतर नाराजगी खुलकर सामने आने लगी। जमीनी स्तर से लेकर सोशल मीडिया तक यह मुद्दा तेजी से तूल पकड़ता दिख रहा है।
पीएम से मुलाकात ने बढ़ाया सियासी तापमान
यही पृष्ठभूमि रही जब उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक अचानक दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की। प्रधानमंत्री गुरुवार को लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण कर चुके थे। कार्यक्रम के तुरंत बाद ब्रजेश पाठक का दिल्ली रवाना होना और अगले ही दिन प्रधानमंत्री के साथ उनकी तस्वीर सामने आना भाजपा के भीतर संभावित रणनीतिक बदलावों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों का मानना है कि संगठनात्मक समीकरण, जातीय संतुलन और मंत्रिमंडल में फेरबदल जैसे मुद्दों पर उच्च स्तर पर मंथन तेज हो सकता है।

 प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल होने से प्रदेश भाजपा की चिंता बढ़ी

सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने संगठन मंत्री बी.एल. संतोष से टेलीफोनिक बातचीत के बाद नोटिस जारी किया था। आज फिर प्रदेश अध्यक्ष ने अपने उसी पुराने रुख को दोहराया। उधर ब्राह्मण नेताओं, ब्राह्मण संगठनों और जमीनी स्तर पर सक्रिय ब्राह्मण समाज के लोगों के बीच इसे लेकर नाराजगी गहरी दिखाई दे रही है। प्रदेश अध्यक्ष सोशल मीडिया पर लगातार ट्रोल हो रहे हैं, जिसे देखते हुए भाजपा की चिंता और बढ़ गई

 

बैठक में शामिल विधायकों की लगातार हो रही बातचीत पार्टी के भीतर हलचल!

जाति विशेष के विधायकों की अलग–अलग बैठकों के बाद से ही प्रदेश की राजनीति में जातीय संतुलन का प्रश्न केंद्र में आ गया है। बताया जा रहा है कि सहभोज में शामिल रहे हों या व्यस्तता के कारण न पहुंच सके हों, ब्राह्मण विधायकों के बीच लगातार टेलीफोनिक संपर्क बना हुआ है। पार्टी संगठन के भीतर भी इस पूरे प्रकरण को लेकर हलचल साफ महसूस की जा रही है। सर्द हवाओं के बीच भाजपा के भीतर उठती यह राजनीतिक गर्मी कार्यकर्ताओं में बेचैनी और उत्सुकता दोनों बढ़ा रही है।

‘शिष्टाचार भेंट’ का दावा, लेकिन संकेत गहरे!

हालांकि उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपनी मुलाकात को महज शिष्टाचार भेंट बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री का आशीर्वाद लिया और मार्गदर्शन प्राप्त किया। इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का एक बड़ा वर्ग इस भेंट को सामान्य मुलाकात मानने को तैयार नहीं दिखता। नए प्रदेश अध्यक्ष की तैनाती के बाद इस मुलाकात के निहितार्थ और गहरे माने जा रहे हैं।
आगे क्या? सबकी निगाहें टिकी
फिलहाल सहभोज विवाद, नोटिस प्रकरण और ब्राह्मण समाज की नाराजगी के बीच यह मुलाकात किस दिशा में परिणाम देगी, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इतना तय माना जा रहा है कि ठंड के मौसम में भी यूपी की सियासत का पारा लगातार चढ़ा हुआ है और आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की आहट सत्ता और संगठन दोनों के गलियारों में महसूस की जा रही है।

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