
जन एक्सप्रेस।हरिद्वार/चंद्रप्रकाश बहुगुणा: जनवरी 2026 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले अखिल विश्व गायत्री परिवार के जन्मशताब्दी समारोह को लेकर राजस्थान के युवाओं को विशेष मार्गदर्शन दिया गया। इस उद्देश्य से अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या राजस्थान प्रवास पर गये। इस दौरान नदबई एवं नीमकाथाना में आयोजित गायत्री महायज्ञों में उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को शताब्दी समारोह की भावना, उद्देश्य और सहभागिता को लेकर प्रेरित किया। नदबई में 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ तथा नीमकाथाना में 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया।महायज्ञ में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए डॉ. पंड्या ने कहा कि जन्मशताब्दी वर्ष भारत और भारतीय संस्कृति की सशक्त पुकार है, जो प्रत्येक व्यक्ति से यह अपेक्षा करता है कि वह अपने जीवन को राष्ट्रहित, समाजहित और मानवहित में समर्पित करे। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन का परम लक्ष्य – “मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण” है। यही जीवन की सर्वाेच्च साधना और उसकी वास्तविक सार्थकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय युगांतरकारी कालखंड है, जब नर में नारायण, मानव में माधव और मनुष्य में देवत्व के जागरण का आह्वान हो रहा है। डॉ. पंड्या ने कहा कि मनुष्य का चरित्र ही उसकी सबसे बड़ी पूँजी है, और गायत्री परिवार का मूल उद्देश्य बाहरी परिस्थितियों को बदलने से पहले अपने भीतर परिवर्तन लाना है। डॉ. पंड्या ने कहा कि जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा का जीवन-दर्शन युवाओं को आत्मचिंतन, आत्मपरिष्कार और युग निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यही साधना व्यक्ति को आत्मिक रूप से सशक्त बनाकर समाज और राष्ट्र के नव निर्माण में सहभागी बनाती है।उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे श्रद्धा, भक्ति और समर्पण भाव के साथ इस पावन दीप महायज्ञ में भाग लें, जिससे जीवन में आध्यात्मिक जागृति, आत्मिक सशक्तिकरण और युग निर्माण के संकल्प को बल मिले। इस अवसर पर निकटवर्ती जनपदों से बड़ी संख्या में लोग यज्ञीय ऊर्जा से लाभान्वित हुए। कार्यक्रम में हजारों गायत्री साधकों सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।






