उत्तराखंडदेहरादून

आपदा से पहले चेतावनी की तैयारी: उत्तराखंड में मजबूत होगा अर्ली वॉर्निंग सिस्टम

CM धामी ने केंद्रीय टीम संग बैठक में उठाई मांग, कहा— जान-माल की रक्षा के लिए आधुनिक पूर्वानुमान प्रणाली जरूरी

जन एक्सप्रेस देहरादून:उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में आपदा प्रभावित क्षेत्रों के सर्वेक्षण के लिए आई केंद्रीय टीम के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की भूगर्भीय संवेदनशीलता और आपदा जोखिमों का ज़िक्र करते हुए अर्ली वॉर्निंग सिस्टम को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने की पुरजोर मांग की।

क्या है अर्ली वॉर्निंग सिस्टम?

अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (Early Warning System) एक वैज्ञानिक तकनीकी तंत्र है, जो संभावित प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूस्खलन, बाढ़, भारी वर्षा, बादल फटना आदि की पूर्व सूचना देने का काम करता है।इसमें अत्याधुनिक सेंसर, उपग्रह डेटा, मौसम केंद्रों की रिपोर्ट, और भौगोलिक विश्लेषण का उपयोग करके खतरे का अनुमान लगाया जाता है।जैसे ही किसी खतरे की संभावना बनती है, संबंधित विभागों और नागरिकों को तत्काल अलर्ट जारी कर दिया जाता है ताकि समय रहते जान-माल की रक्षा की जा सके।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

मौसम, जल स्तर और ज़मीन की स्थिति की निरंतर निगरानी की जाती है।

एकत्रित डेटा का विश्लेषण करके जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान की जाती है।

खतरे की स्थिति में जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय नागरिकों को सूचित किया जाता है।

प्रणाली को राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से संचालित किया जाता है।

उत्तराखंड में क्यों है इसकी जरूरत?

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड एक भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य है, जो हर साल मानसून में बाढ़, भूस्खलन, अतिवृष्टि जैसी आपदाओं का सामना करता है।
केवल इस वर्ष, राज्य में 1900 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ है।

उन्होंने चेताया कि यदि समय रहते प्रभावी चेतावनी प्रणाली न हो, तो जनहानि और वित्तीय नुकसान की भरपाई कर पाना मुश्किल होता है।

बैठक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे

1. उत्तराखंड में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम को राष्ट्रीय संस्थानों की मदद से अपग्रेड किया जाए।

2. पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और ज़मीन के स्थायी नुकसान से निपटने की विशेष कार्ययोजना बने।

3. नदियों में सिल्ट भराव (गाद जमा) पर भी ध्यान दिया जाए, जो भविष्य में बाढ़ का कारण बन सकता है।

CM धामी का कहना अर्ली वॉर्निंग सिस्टम जितना सशक्त और वैज्ञानिक होगा, आपदा से होने वाले नुकसान उतना ही कम किया जा सकेगा। यह न सिर्फ लोगों की जान बचाने, बल्कि समय पर राहत व बचाव कार्य शुरू करने में भी मददगार होगा।”

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