बाबा बागेश्वर की कथा में भावुक क्षण: 20 साल बाद आधे दर्जन से अधिक हिंदुओं की सनातन धर्म में घर वापसी

जन एक्सप्रेस/महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की धर ती पर बागेश्वर धाम सरकार की कथा के दौरान एक भावुक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब बीस वर्ष पूर्व धर्म परिवर्तन कर चुके आधे दर्जन से अधिक हिंदुओं ने सनातन धर्म में पुनः सम्मानपूर्वक घर वापसी की। यह कार्यक्रम गोंदिया जिले में आयोजित कथा मंच से संपन्न हुआ, जहां बागेश्वर महाराज की उपस्थिति में सभी परिवारों ने विधि-विधान के साथ सनातन धर्म को पुनः स्वीकार किया।
कथा मंच से हुई घर वापसी
गोंदिया जिले के ग्राम छोटी, पोस्ट तुगुड़ी के निवासी शिवदास, शिमला, कन्हाभगत, संजय भगत, कुंवर अक्षय सहित अन्य सदस्यों ने सार्वजनिक रूप से सनातन धर्म में वापसी की। सभी लोगों को व्यास पीठ के समीप बुलाया गया, जहां मंत्रोच्चार के साथ उनके माथे पर त्रिकुंड चंदन लगाया गया और गले में बागेश्वर बालाजी की पट्टिका पहनाई गई।
कथा पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को तालियों और जयकारों के साथ देखा, जिससे पूरा वातावरण भावनात्मक हो गया।
2006 में क्यों बदला था धर्म?
घर वापसी करने वाले परिवार के सदस्यों ने बताया कि वर्ष 2006 में उनके पुत्र संजय भगत के जन्म के बाद से उसकी आंखों की रोशनी कमजोर थी। उसी समय कुछ ईसाई धर्म के अनुयायियों द्वारा यह कहकर उन्हें प्रलोभन दिया गया कि यदि वे ईसाई धर्म अपना लें, तो बच्चा स्वस्थ हो जाएगा और उसकी दृष्टि लौट आएगी।
परिवार ने बताया कि इसी आशा और मजबूरी में उन्होंने पूरे परिवार सहित धर्म परिवर्तन कर लिया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद न तो बच्चे की आंखों की समस्या का समाधान हुआ और न ही उन्हें मानसिक शांति प्राप्त हुई।
“हम अपनी गलती स्वीकार करते हैं”
घर वापसी करने वाले परिवार ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि धर्म परिवर्तन उनका जीवन का सबसे बड़ा भ्रम था। उन्होंने कहा कि जिस आश्वासन के कारण उन्होंने ईसाई धर्म अपनाया था, वह कभी पूरा नहीं हुआ।
परिवार के सदस्य ने कहा,
“हम अपनी त्रुटि स्वीकार करते हैं। आज बागेश्वर महाराज की कथा में हमें सम्मानपूर्वक सनातन धर्म में लौटने का अवसर मिला। बीते एक वर्ष से हम महाराज को टीवी पर देख रहे थे, लेकिन सहयोग के अभाव में घर वापसी नहीं कर पा रहे थे। आज हमारा यह संकल्प पूर्ण हुआ है।”
बागेश्वर महाराज की अपील
इस अवसर पर बागेश्वर महाराज ने देशभर में धर्मांतरित हिंदुओं से भावुक अपील की। उन्होंने कहा,
“जिनके पूर्वज रामलाल, श्यामलाल थे, वे अपने मूल सनातन धर्म में पुनः लौट आएं। सनातन ही हमारी पहचान और संस्कृति की जड़ है।”
महाराज की इस अपील का कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं ने जोरदार समर्थन किया।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
घर वापसी के इस आयोजन के दौरान कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। लोगों ने इसे सनातन संस्कृति की जीत बताया। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि यह आयोजन उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो किसी भ्रम या मजबूरी में अपने धर्म से दूर हो गए हैं।
भविष्य को लेकर संकल्प
घर वापसी करने वाले परिवारों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे भविष्य में किसी भी परिस्थिति में अन्य धर्म नहीं अपनाएंगे और सनातन धर्म के प्रति पूर्ण निष्ठा बनाए रखेंगे। उन्होंने बागेश्वर महाराज का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें आत्मिक शांति और सम्मान की अनुभूति हो रही है।





