अवैध निर्माण पर जीडीए की दोहरी नीति , अवैध निर्माण को संरक्षण
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही निष्प्रभावी

जन एक्सप्रेस / गाजियाबाद : गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही निष्प्रभावी साबित हो रही है। अधिशाषी अभियंता की उदासीनता और सहायक अभियंता की लापरवाही और अवर अभियंता की अनदेखी से अवैध निर्माण को प्रश्रय दिया जा रहा है। जबकि उपाध्यक्ष अतुल वत्स और उनके अधीनस्थ अधिकारियों की फौज , प्रवर्तन दल, ओएसडी समेत अन्य पद धारण किए अधिकारी अवैध निर्माण पर रोक के दावे लगातार शासन और प्रशासन को दे रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर मामला कुछ और ही है। निजी स्वार्थ की नीति इस कदर हावी है कि इंदिरापुरम, वैशाली ,राजेंद्रनगर, शालीमार गार्डन समेत गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अन्य क्षेत्रों में धड़ल्ले से अवैध निर्माण जारी है। जिसके लिए मुख्य रूप से संबंधित क्षेत्र के अवर अभियंताओं, और उच्च अभियंताओं की पूरी टीम है। जमीन पर खुदाई होने के बाद से ही जीडीए कर्मचारियों का प्लॉट पर चहलकदमी शुरू हो जाती है। जो नोटिस, सीलिंग , ध्वस्तीकरण के आदेश और एफआईआर के शक्ल में निजी स्वार्थ की पूर्ति के बाद फाइल बंद और निर्माण पूरा हो जाता है। जीडीए द्वारा कानून की कार्यवाही और ध्वस्तीकरण के नाम पर जो वसूली शुरू होती है। उसका परिणाम बिल्डिंग के पूर्ण रूप को देखकर और मानचित्र के विपरीत खड़ी इमारतों को देखकर किया जा सकता है।
ज्ञान खंड इलाके में सेंट थॉमस स्कूल के सामने ऐसे ही एक मानचित्र के विपरीत निर्माण हो रहा है। सूत्रों की माने तो रसूखदार की जीडीए अधिकारियों से जबरदस्त सेटिंग की बात अंदरखाने प्रचारित कराई जा रही है। जिससे जनता शिकायत ही नहीं करें। जबकि विभाग पहले ही कागजी खानापूर्ति वाली नोटिस इत्यादि की कार्यवाही कर ली होगी लेकिन आजतक जीडीए का पीला पंजा इसपर नहीं चल सका। यही तो रसूख है जिसमें प्रशासनिक और क्षेत्रीय अधिकारियों की मिली भगत को उजागर किया है।






