उत्तर प्रदेशगाजियाबाद

एम्स सैटेलाइट सेंटर और श्री दूधेश्वर नाथ कॉरिडोर परियोजना को लेकर गाजियाबादी हुए निराश

गाजियाबाद के स्वास्थ्य और धार्मिक क्षेत्र में बढ़ते कदम रुके

जन एक्सप्रेस/ शैलेश पाण्डेय/ गाजियाबाद: एम्स के सैटेलाइट सेंटर और श्री दूधेश्वर नाथ कॉरिडोर परियोजना के लटकने से गाजियाबाद के निवासी निराश हैं। यह परियोजनाएं गाजियाबाद के विकास के लिए महत्वपूर्ण थीं, लेकिन अब योगी सरकार के बजट में इनके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। जबकि गाजियाबाद के उपचुनाव में खुले मंच से मुख्यमंत्री योगी ने जनता से जीत के तोहफे में जनपद को इन योजनाओं का लाभ मिलने की बात सार्वजनिक मंच से कही थी । जनता ने तो प्रचण्ड बहुमत से गाजियाबाद सदर से संजीव शर्मा को विधायक बनाकर अपना वादा पूरा किया लेकिन अब बारी मुख्यमंत्री योगी और उनके राजनीतिक साथियों की थी , जिसे पूरा करने में वह चूक गए हैं।

गाजियाबाद के निवासी यह सवाल उठा रहे हैं कि जब गाजियाबाद उत्तर प्रदेश के विकास में सर्वाधिक राजस्व देने का योगदान करता है, तो फिर उसे योगी सरकार के बजट का लाभ क्यों नहीं मिल रहा है ? जनता स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, नाली, सड़क और सार्वजनिक स्थलों के विकास और अनुरक्षण में प्रशासनिक उदासीनता से नाराज हैं।
इस मुद्दे पर सत्ताधारी नेता और विपक्षी दल अलग-अलग राय रखते हैं। सत्ताधारी नेता इसे ऐतिहासिक और अच्छा बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल औपचारिक विरोध दर्शा रहे हैं। लेकिन गाजियाबाद के निवासी इस परियोजना के लटकने से निराश हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द ही इस पर काम करेगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद में श्री दूधेश्वर नाथ कॉरिडोर और एम्स सेटेलाइट सेंटर स्थापना का वादा किया है। यह परियोजनाएं गाजियाबाद के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं और स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार के अवसर प्रदान करेंगी ।

श्री दूधेश्वर नाथ कॉरिडोर परियोजना गाजियाबाद के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को बढ़ावा देगी, जबकि एम्स सेटेलाइट सेंटर स्थापना से स्थानीय लोगों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं न्यूनतम दर पर मिलेंगी । यह परियोजनाएं योगी सरकार की विकासात्मक योजनाओं का हिस्सा हैं और गाजियाबाद को एक स्मार्ट सिटी बनाने में मदद करेंगी ।

निजीस्वार्थ की भूख ने जनता को सरकारी योजनाओं के लाभ से किया वंचित
योगी सरकार 2025-2026 के बजट को ऐतिहासिक बताकर पीठ थपथपा रही है । नगर विकास के मद में 25,308.48 करोड़ और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 50,550.42 करोड़ का बजट में प्राविधान किया है। लेकिन सरकारी जमीनों की उपलब्धता और जनता की जरूरतों के बाद भी कई योजनाएं विभागीय अधिकारियों की उदासीनता से परवान नहीं चढ़ पा रही है। उदाहरण के रूप में देखे तो आवास विकास परिषद वसुंधरा योजना में कालोनी विकसित करते समय सरकारी अस्पताल, सरकारी स्कूल कॉलेज, सामुदायिक भवन और जनोपयोगी सुविधाएं मुहैया करने के लिए भूमि आरक्षित करने का वादा किया । लेकिन अब जब योजनाओं को मूर्त रूप देने की बात आ रही है तो आवास विकास परिषद के लखनऊ और मुख्यालय में बैठे अधिकारियों की नजरें निजी निर्माणकर्ताओं पर इनायत होने लगी हैं। जिसके कारण जनता एक बार फिर अपने अधिकारों के लिए आंदोलन के लिए बाध्य जाएगी । वसुंधरा के सेक्टर 7 और 9 में खाली पड़ी बेशकीमती जमीन को एम्स के अधिकारियों द्वारा सैटेलाइट सेंटर के लिए सर्वाधिक उपयुक्त बताए जाने के बाद भी विभागीय अधिकारी इस मुद्दे पर सरकार से वास्तविक स्थिति क्यों नहीं स्पष्ट कर रहे जनता लगातार पूछ रही है , जबकि अधिकारी निजी बिल्डरों को जमीन देने के लिए अपने फैसले पर अडिग दिख रहा है। जनता की माने तो अधिकारियों की बिल्डरों से सांठ गांठ की कहानी बहुचर्चित है। जिसमें क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और सत्ता में रसूख रखने वाले माननीय की भी भूमिका पर सवालिया निशान अब जनता लगाने लगी है । जनता योगी सरकार की नीतियों और घोषणाओं से खुश है लेकिन उसको आकर देने वाले अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही से नाखुश । आखिर जनता के अधिकारों की सुध कौन लेगा यह देखना है ?

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