परियोजना का शेष निर्माण और विकास कार्य अगले 12 माह में पूरा करने की मिली मोहलत

लखनऊ । उ.प्र. रेरा ने गौतमबुद्ध नगर की एक अवरुद्ध परियोजना, एलिगेंट विले के आवंटियों के हितों को देखते हुए रेरा अधिनियम की धारा-8 के अन्तर्गत परियोजना पुनर्वास की स्वीकृत दे दी है। इसके लिए वर्तमान प्रोमोटर एलिगेंट इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड तथा फ्लोरल रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड के मध्य एवं बहुतायत आवंटियों की सहमति से परियोजना के शेष निर्माण और विकास कार्य अगले 12 माह में पूरा करने के लिए एलिगेंट इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड को अधिकृत किया गया है।
एलिगेंट विले परियोजना भूखंड संख्या जीएच-06बी, टेक्जोन-4, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गौतमबुद्ध नगर जनपद में स्थित है। परियोजना के प्रोमोटर मेसर्स एलिगेंट इंफ्राकॉन प्रा.लि. द्वारा परियोजना के तीनों फेज को वर्ष 2017 में उ.प्र. रेरा में पंजीकृत कराया गया था, लेकिन वैध पंजीकरण अवधि तक परियोजना का निर्माण पूर्ण नहीं किया जा सका। फेज-1 (UPRERAPRJ10120) का पंजीयन अगस्त 2018, फेज-3 (UPRERAPRJ10224) का पंजीयन फरवरी 2019 तथा फेज-4 (UPRERAPRJ10234) का पंजीयन जुलाई 2019 को समाप्त हो गया था। एलिगेंट विले परियोजना के फेज-1 में टावर सी व डी, फेज-3 में टावर बी व इ तथा फेज-4 में टावर ए व एफ मिलाकर कुल 06 टावर हैं जिनके 761 इकाइयों का शेष निर्माण और विकास कार्य उ.प्र. रेरा की निगरानी में पूर्ण करके ओसी का आवेदन किया जाएगा।
एलिगेंट विले परियोजना के स्थलीय निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर फेज-1 में 75-78 प्रतिशत, फेज-3 में 74-76 प्रतिशत और फेज-4 में 60 प्रतिशत तक निर्माण हुआ है। एलिगेंट विले में की कुल 761 इकाइयों में से 686 इकाइयों की बिक्री हो चुकी है जबकि 75 इकाइयों का विक्रय होना है। एक अनुमान के अनुसार परियोजना के पूर्ण होने से कुल 120.01 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं, जिसमें मौजूदा आवंटियों से रुपये 65.93 करोड़ तथा शेष इकाइयों का विक्रय कर 47.58 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। परियोजना को पूरा करने व अन्य सभी प्रकार के व्यय की अनुमानित लागत लगभग रुपये 90.5 करोड़ रुपये है। इस प्रकार परियोजना आर्थिक रूप से व्यवहार्य है और इसे पूरा किया जा सकता है।
रेरा अधिनियम के अनुसार एलिगेंट विले परियोजना के सभी फेज में पंजीयन विस्तार की अधिकतम समयसीमा समाप्त हो चुकी थी। उ.प्र. रेरा ने परियोजना का निर्माण पूर्ण करने हेतु प्रोमोटर को आवंटियों की सहमति के साथ योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इसी क्रम में प्रोमोटर एलिगेंट इंफ्राकॉन ने फ्लोरल रियलटेक के साथ हुई सहमति तथा आवंटियों की सहमति से परियोजना पूरा करने की योजना से अवगत कराया। एनसीआर क्षेत्रीय कार्यालय में स्थापित परियोजना प्रबंधन प्रकोष्ठ द्वारा प्रोमोटर की परियोजना पूर्ण करने हेतु प्रस्तुत योजना की गहन समीक्षा की गयी तथा प्रोमोटर द्वारा प्रस्तुत परियोजना पूर्ण करने की योजना को स्वीकार करने योग्य पाया। अतः उचित प्राविधानों के अन्तर्गत, आवंटियों के हितों की रक्षा और रेरा अधिनियम के उद्देश्यों के अनुरूप, उ.प्र. रेरा ने अधिनियम की धारा-8 के साथ धारा-6 और 37 के प्राविधानों के तहत परियोजना को पूरा कराने के लिए पूर्ण सहयोग देने का निर्णय लिया।
एलिगेंट विले के आवंटियों ने उ.प्र. रेरा द्वारा परियोजना के पुनर्वास और इसे पूरा करने की दिशा में जारी किए गए आदेश से संतुष्ट होते हुए अपने घरों का शीघ्र कब्जा मिलने एवं सभी सुविधाएं प्राप्त होने की संभावना से प्रसन्नता व्यक्त की और इस संबंध में उ.प्र. रेरा के प्रयासों की सराहना की। ज्ञात हो कि फ्लोरल रियलकॉन ने पिछले वर्ष एलीगेंट इंफ्राकॉन की स्प्लेन्डर परियोजना के शेष निर्माण व विकास कार्यों को पूर्ण करने की जिम्मेदारी ली थी जिसकी प्रगति से आवंटी सन्तुष्ट हैं।
इस अवसर पर उ.प्र. रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि “हम विशेष रूप से अवरुद्ध परियोजनाओं के सभी हितधारकों, विशेष रूप से आवंटियों के हितों की रक्षा करने के सभी सम्भव प्रयास कर रहे हैं। एलिगेंट विले इस क्रम में 18वीं परियोजना है जिसमें शेष विकास कार्य को प्रोमोटर और आवंटियों की आपसी सहमति से पूरा कराने की मांग की गई है। रेरा के प्राविधानों के तहत हम इस प्रकार के अन्य परियोजनाओं को पूरा करने की सभी संभावनाओं की जांच-पड़ताल कर रहे है जिससे निर्माण कार्य को प्रोत्साहन मिले और ऐसी अन्य अवरुद्ध परियोजनाएं पूर्ण हो सके। वर्षों से अवरुद्ध परियोजनाओं का शीघ्र पुनर्निर्माण रियल एस्टेट सेक्टर के विकास के लिए महत्वपूर्ण है जिससे परियोजनाओं के घर खरीदारों को घर मिलने के साथ -साथ सम्पूर्ण रियल एस्टेट सेक्टर को नई दिशा और ऊर्जा मिल सकेगी। ‘अवरुद्ध परियोजना का पुनर्वास’ आवंटियों तथा प्रोमोटर्स के लिए परियोजना पूरा करने के लिए एक मौका होने के साथ-साथ एक संयुक्त जिम्मेदारी भी है।”
उत्तर प्रदेश में 18 अवरुद्ध रियल एस्टेट परियोजनाओं का पुनर्वास संभवत: अपने तरह का प्रथम प्रयास है जो रेरा अधिनियम के प्राविधानों के तहत देश के किसी भी राज्य द्वारा पहली बार किया जा रहा है। ऐसी परियोजनाएं, जो या तो अवरुद्ध हैं या जिनका पंजीकरण समाप्त हो गया है या पंजीकरण रद्द कर दिया गया है, का शेष विकास और निर्माण कार्य पूरा कराना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक पथ-प्रदर्शक कदम है। निःसंदेह, ऐसी अवरुद्ध परियोजनाओं के पुनर्वास से घर खरीदारों के हितों की रक्षा होगी और उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र के हितधारकों का विश्वास बढ़ेगा। जेपी कैलिप्सो कोर्ट को विकास प्राधिकरण से ओसी प्राप्त हो चुकी है। जेपी नाइट कोर्ट एवं वसुंधरा ग्रांड ने ओसी हेतु आवेदन कर दिया है तथा यूनिबेरा टॉवर्स और प्लूमेरिया होम्स एनसीएलटी से आच्छादित है।
नियामक प्राधिकरण ने परियोजना का सफलतापूर्वक निर्माण करने की ये शर्तें रखीं
– सर्वप्रथम रुपये 4.50 करोड़ की अग्रिम धनराशि अगले तीन माह तथा रुपये 02 करोड़ अगले 06 माह में परियोजना के नाम पर एक अलग बैंक खाते/एस्क्रौ अकाउंट में जमा करना होगा, जिससे विकास व निर्माण कार्य निरन्तर चलता रहे। प्रोमोटर और आवंटियों से भविष्य के सभी भुगतानों को इसी एस्क्रौ अकाउंट में जमा किया जाएगा तथा सम्पूर्ण धनराशि का उपयोग केवल रेरा अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुरूप परियोजना के निर्माण और विकास के लिए ही किया जाएगा।
– परियोजना की प्रगति की निगरानी उ.प्र. रेरा के एक सदस्य की अध्यक्षता में परियोजना सलाहकार एवं निगरानी समिति (पीएएमसी) द्वारा की जायेगी। इस समिति में जी.एन.आई.डी.ए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के साथ-साथ उ.प्र. रेरा के कंसीलिएशन सलाहकार, वित्त नियंत्रक, तकनीकी सलाहकार, विशेष रूप से नियुक्त निर्माण सलाहकार और परियोजना प्रबंधन प्रभाग (पीएमडी) व आवंटी संघ के सदस्य भी शामिल होंगे।
– प्राधिकरण परियोजना को पुनर्वास के तहत परियोजनाओं की विशेष श्रेणी में स्थानांतरित करेगा, प्रति तिमाही में इसकी प्रगति की समीक्षा करेगा तथा एक तृतीय पक्ष निर्माण सलाहकार की नियुक्ति कर निर्माण व वित्तीय स्थिति की निरन्तर समीक्षा करेगा।






