उत्तराखंडविकासनगर

हर्षुल शर्मा एडवोकेट और कांग्रेस पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष ने पछवा दून क्षेत्र में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर तीखा हमला बोला

जन एक्सप्रेस/ विकासनगर: पछवादून क्षेत्र के निजी स्कूलों में एनसीईआरटी (NCERT) पैटर्न को ठेंगा दिखाकर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोपने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता हर्षुल शर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्कूल प्रबंधन और बुक डिपो संचालकों के बीच चल रहे ‘कमीशन खेल’ पर कड़ा प्रहार किया है।

भ्रष्टाचार का आरोप: “मोटा मुनाफा कमा रहे स्कूल”

हर्षुल शर्मा एडवोकेट ने आरोप लगाया कि शासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद निजी स्कूल अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

  • चुनिंदा बुक डिपो का सिंडिकेट: स्कूल प्रबंधन विशिष्ट बुक डिपो के साथ साठगांठ कर अभिभावकों को वहीं से किताबें खरीदने पर मजबूर कर रहे हैं।

  • कमीशन का खेल: आरोप है कि निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगवाकर स्कूल प्रबंधन हर साल बुक डिपो संचालकों से मोटा कमीशन वसूल रहा है।

  • अधिकारियों की चुप्पी: शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण इस संगठित भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस नेता ने शासन-प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि निजी स्कूलों की इस तानाशाही पर शीघ्र लगाम नहीं लगाई गई, तो कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगी। उन्होंने कहा कि मिडिल और लोअर मिडिल क्लास परिवारों पर शिक्षा के नाम पर डाला जा रहा यह अतिरिक्त बोझ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

खंड शिक्षा अधिकारी का पक्ष

इस गंभीर मामले पर विकासनगर की खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) विनीता कठैत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“हमारी टीम लगातार स्कूलों की मॉनिटरिंग कर रही है। यदि कोई भी स्कूल सरकारी आदेशों का उल्लंघन करता पाया गया या हमारे संज्ञान में ठोस शिकायत आई, तो संबंधित स्कूल के खिलाफ तत्काल सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

देशव्यापी समस्या बनी ‘महंगी शिक्षा’

यह समस्या केवल विकासनगर तक सीमित नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों से लगातार ऐसी शिकायतें आती रहती हैं जहाँ निजी स्कूल राज्य पाठ्यक्रम या एनसीईआरटी की जगह निजी पब्लिशर्स की किताबें जबरन बेचते हैं। इससे शिक्षा का व्यवसायीकरण बढ़ रहा है और आम जनता पर आर्थिक बोझ असहनीय होता जा रहा है।

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