
जन एक्सप्रेस/ नई टिहरी : टिहरी जनपद के बौराड़ी और आसपास के क्षेत्रों में हुई भारी ओलावृष्टि ने स्थानीय किसानों और बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। बेमौसम ओलों की मार से फसलों और फलों को भारी नुकसान होने की आशंका गहरा गई है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए ‘उत्तराखंड किसान सभा टिहरी जिला कौंसिल’ ने जिला प्रशासन से तत्काल मामले का संज्ञान लेने और प्रभावितों को राहत पहुंचाने की पुरजोर मांग की है।
तैयार खड़ी फसलों और फलों के ‘फ्लोरिंग’ सीजन पर मार
किसान सभा के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय ऋतु परिवर्तन (मौसम बदलने) का है, जो खेती के लिहाज से बेहद संवेदनशील होता है। ओलावृष्टि से किसानों को दोहरा नुकसान हुआ है:
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तैयार फसलें बर्बाद: इस समय खेतों में गेहूं, जौ और लाई (सरसों प्रजाति) की फसलें लगभग पककर तैयार खड़ी हैं। ओलावृष्टि से इनके दाने झड़ गए हैं और डंठल टूट गए हैं।
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बागवानी पर संकट: यह समय सेब, आडू और प्लम जैसे फलदार पेड़ों पर फ्लोरिंग (फूल आने) का है। ओलों की बौछार से फूल झड़ गए हैं, जिससे भविष्य में फलों के उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इसके अलावा, हाल ही में रोपी गई बेल वाली सब्जियों की पौध भी नष्ट हो गई है।
जिला प्रशासन से तत्काल सर्वे और मुआवजे की मांग
उत्तराखंड किसान सभा ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से अपील की है कि वे अन्नदाताओं के दर्द को समझें और त्वरित कदम उठाएं। कौंसिल ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
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त्वरित सर्वेक्षण: प्रशासन तत्काल राजस्व और कृषि विभाग की टीमों को फील्ड में भेजकर ओलावृष्टि से हुए नुकसान का सटीक आकलन (सर्वे) करवाए।
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शासन को रिपोर्ट: जिले के विभिन्न क्षेत्रों से नुकसान का डेटा जल्द से जल्द शासन को भेजा जाए, ताकि प्रभावित किसानों के लिए राहत राशि जारी हो सके।
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उचित मुआवजा: संकट की इस घड़ी में प्रभावित किसानों और बागवानों को उनके आर्थिक नुकसान के अनुरूप उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।






