उत्तराखंडदेहरादून

नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट: तीन दिन तक कड़ी निगरानी, बिना दस्तावेज प्रवेश नहीं

सीएम धामी के निर्देश पर सख्ती बढ़ी, सभी चेकपोस्ट सक्रिय, सीमांत जिलों में QRT और सुरक्षा बल तैनात

जन एक्सप्रेस, देहरादून।उत्तराखंड से सटी नेपाल सीमा पर आगामी तीन दिनों तक हाई अलर्ट जारी किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार रात उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद सुरक्षा एजेंसियों को चौकसी और गश्त तेज करने के निर्देश दिए हैं। नेपाल में हाल ही के राजनीतिक घटनाक्रम के चलते यह निर्णय लिया गया है।सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि बिना वैध दस्तावेज, पहचान पत्र और ठोस कारण के कोई भी व्यक्ति उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश नहीं कर पाएगा। सीमांत जिलों—चंपावत, पिथौरागढ़ और ऊधम सिंह नगर—में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

गश्त बढ़ी, बिना चेकपोस्ट वाले इलाकों में QRT तैनात

सीएम ने पुलिस, सशस्त्र सीमा बल और वन विभाग को निर्देश दिए हैं कि जहां चेकपोस्ट नहीं हैं, वहां त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) और सुरक्षा टीमें लगातार गश्त करें। वन क्षेत्रों में भी अवांछित गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग की टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।

इंटरनेट पर भी निगरानी, अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश

मुख्यमंत्री ने इंटरनेट मीडिया की सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की भ्रामक सूचना, अफवाह या उकसाने वाले कंटेंट को तुरंत चिन्हित कर उस पर कार्रवाई की जाएगी। असामाजिक तत्वों पर भी विशेष निगरानी रखने के लिए कहा गया है।

स्थानीय सहयोग भी लिया जाएगा

सीएम धामी ने जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि स्थानीय ग्राम समितियों और ग्रामीणों का सहयोग लेकर सामुदायिक निगरानी को भी मजबूत किया जाए। साथ ही, सभी झूला पुल और पारंपरिक मार्गों पर चेकपोस्ट सक्रिय कर निगरानी बढ़ाई जाए।

उच्च स्तरीय बैठक में रणनीति तय

इस निर्णय से पहले मुख्यमंत्री धामी ने एक अहम बैठक की, जिसमें मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के आपसी समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।

275 किमी लंबी सीमा पर चौकसी, हर गतिविधि पर नजर

उत्तराखंड की करीब 275 किलोमीटर लंबी सीमा नेपाल से लगती है, जहां से आवागमन की संभावना बनी रहती है। केंद्र सरकार के निर्देश पर सीमांत राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया गया है।

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