मैं अपराधी हूँ, मगर ज़िंदा हूं: आज़म खान ने कहा —किताबें चुराकर विश्वविद्यालय बनाया
सपा नेता आज़म खान ने मीडिया से बात में कहा — 113 मुकदमों का फैसला अभी बाकी; खुद को भू‑माफिया बताया, प्रदेश के तीन बड़े भूमाफिया में अपना नाम रखा

जन एक्सप्रे लखनऊ:समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान जेल से रिहा होने के बाद लगातार बयानबाजी के कारण सुर्खियों में हैं। मंगलवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्वीकारा कि उन पर कई मुकदमे हैं और कहा, “मैं अपराधी हूँ” — साथ ही उन्होंने खुद को भू‑माफिया की श्रेणी में भी रखकर कहा कि उन्हें 21 साल की सजा और 34 लाख रुपए जुर्माना सुनाया जा चुका है और 113 मुकदमों का फैसला अभी बाकी है। आज़म खान ने मीडिया से कहा कि वे “छोटा सा अपराधी” हैं। उनके अनुसार कई मुकदमों के चलते उन पर कठोर सजा भी सुनाई गई है — “एक ही मुकदमे में 21 साल की सजा और 34 लाख रुपए का जुर्माना”। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने “किताबें चुराकर विश्वविद्यालय बनाया” जबकि अपने घर का निर्माण नहीं कर पाए — अपने दर्द और विडंबनापूर्ण टिप्पणियों के साथ वे खुद को भिन्न पहचान देने की कोशिश करते दिखे। कहा गया कि प्रदेश में तीन बड़े भूमाफिया में उनका नाम भी आता है — पहले आज़म खान, दूसरे अतीक अहमद और तीसरे मुख्तार अंसारी — और दो भूमाफिया मारे गए। आज़म ने कहा, “मैं जिंदा हूँ, मगर कब तक — यह मुझे भी पता नहीं।”






