सरकारी अस्पतालों में बाहर की दवा लिखी तो होगी कार्रवाई — डॉक्टरों पर निलंबन की तलवार
अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य का सख्त निर्देश: OPD में अनुपस्थित डॉक्टर और CMS भी होंगे जिम्मेदार, 15 नवंबर के बाद शुरू होगा निरीक्षण अभियान

जन एक्सप्रेस लखनऊ।उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर की दवाएं लिखने वाले डॉक्टरों पर सख्ती करने का फैसला लिया है।स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब कोई भी सरकारी डॉक्टर पर्ची पर बाहर की ब्रांडेड दवा नहीं लिखेगा।ऐसा करते पकड़े जाने पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी अस्पतालों में सिर्फ सूचीबद्ध जेनेरिक दवाएं ही लिखी जाएंगी
निर्देशों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों को केवल राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित सूची में शामिल जेनेरिक दवाएं ही मरीजों को लिखनी होंगी।यदि किसी डॉक्टर ने पर्ची पर बाहर की ब्रांडेड या निजी कंपनी की दवा लिखी, तो यह आदेश का उल्लंघन माना जाएगा और सख्त कार्रवाई होगी।अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा है कि मरीजों को ऐसी स्थिति में महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं या शासन को सीधे शिकायत करने का अधिकार होगा।
OPD समय में अनुपस्थित डॉक्टरों पर भी गिरेगी गाज
सरकारी अस्पतालों में अब OPD समय में अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों पर भी कार्रवाई होगी।
स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि डॉक्टर के साथ CMS (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक) को भी समान रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।निरीक्षण के दौरान अनुपस्थिति या लापरवाही मिलने पर दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
15 नवंबर के बाद होगी औचक जांच, शासन स्तर की तीन टीमें करेंगी निरीक्षण
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि 15 नवंबर के बाद पूरे प्रदेश में औचक निरीक्षण अभियान शुरू किया जाएगा।
इसके लिए शासन स्तर पर तीन विशेष टीमें गठित की जा रही हैं, जो अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता,डॉक्टरों की उपस्थिति, औरमरीजों को दी जा रही चिकित्सा सेवाओं की निगरानी करेंगी।अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों के चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अस्पतालों में सरकारी आपूर्ति की दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाएं ताकि डॉक्टरों को बाहर की दवा लिखने की जरूरत ही न पड़े।उन्होंने कहा कि यह सख्ती जनहित में और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए की जा रही है।






