
जन एक्सप्रेस/ हरिद्वार: विश्व विख्यात गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में इन दिनों चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आध्यात्मिक ऊर्जा का सागर उमड़ रहा है। नौ दिवसीय विशेष साधना सत्र में देश-विदेश से आए हजारों साधक एकात्म भाव से गायत्री महामंत्र का जप कर अपने अंतःकरण को परिष्कृत कर रहे हैं। साधना के साथ-साथ साधकों के वैचारिक मार्गदर्शन के लिए नियमित सत्संग और व्याख्यानों का भी आयोजन किया जा रहा है।
नारी जागरण: समाज के समग्र विकास की कुंजी
बुधवार को शांतिकुंज के मुख्य सभागार में ‘नारी जागरण’ विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान शांतिकुंज महिला मंडल की बहनों ने परम वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा के जीवन से जुड़े प्रेरक और भावपूर्ण संस्मरण साझा किए।
वक्ताओं ने माता जी के विजन को रेखांकित करते हुए कहा:
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सर्वांगीण विकास: माता जी ने महिलाओं को केवल घर तक सीमित न रखकर उन्हें पौरोहित्य (कर्मकांड), लेखन, शिक्षा, संगीत और सामाजिक नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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आत्मनिर्भरता: नारी सशक्तिकरण उनके जीवन का मुख्य लक्ष्य था, ताकि हर महिला आत्मसम्मान के साथ समाज निर्माण में योगदान दे सके।
राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला
सत्संग के दौरान यह विचार प्रमुखता से उभरा कि मातृशक्ति के जागरण के बिना किसी भी समाज या राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं है। एक संस्कारित और जागरूक नारी ही परिवार और समाज को नई दिशा देने में सक्षम होती है।
साधना और सत्संग का संगम
शांतिकुंज में चल रही इस नौ दिवसीय साधना में उपासना के माध्यम से परमात्मा से जुड़ने की सरल विधियों और साधना की सफलता के सूत्रों पर भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित हजारों साधकों ने नारी उत्थान और समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का सामूहिक संकल्प लिया।






