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जौनपुर: महराजगंज ब्लॉक में भ्रष्टाचार की परत-दर-परत खुली पोल!

जांच रिपोर्ट में इंटरलॉकिंग, शौचालय, रेस्ट रूम व सौंदर्यीकरण कार्यों में भारी अनियमितताओं की पुष्टि

जन एक्सप्रेस।जौनपुर:  उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के विकास खंड महराजगंज में “जीरो टारलेंस” और पारदर्शिता के दावों की हकीकत उस समय सामने आ गई, जब उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में दर्जनों विकास कार्यों में गंभीर वित्तीय और तकनीकी अनियमितताओं की पुष्टि हुई। ब्लॉक प्रमुख श्रीमती मांडवी सिंह पत्नी विनय सिंह के कार्यकाल में कराए गए कार्यों को लेकर यह जांच जिलाधिकारी जौनपुर के आदेश पर गठित समिति ने की थी। जांच आख्या शासन को भेज दी गई है। मामला पंचायती राज समिति, विधान सभा लखनऊ के पटल पर भी लंबित है, जिससे अब पदमुक्ति और विधिक कार्रवाई की मांग और तेज हो गई है।

शिकायत से जांच तक की पूरी कहानी

ग्राम पंचायत मीरापुर शिरोमणि निवासी देवी प्रसाद मिश्र ने 4 अप्रैल 2023 को विकास खंड महराजगंज में कराए गए कार्यों में भ्रष्टाचार की शिकायत शासन से की थी। शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी जौनपुर ने नियमावली 1997 के तहत अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की। समिति में वरिष्ठ कोषाधिकारी और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को सदस्य बनाया गया। कई महीनों तक अभिलेखों और स्थलीय निरीक्षण के बाद समिति ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार की।

निजी परिसरों में सरकारी धन से निर्माण

जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि कई स्थानों पर सार्वजनिक उपयोग के लिए स्वीकृत कार्य निजी परिसरों में करा दिए गए।
ग्राम पंचायत मजीठी में इंटरलॉकिंग सड़क की बजाय एक व्यक्ति के निजी परिसर में पाई गई।
भटौली गांव में कई शौचालय निजी भवनों या निजी बाउंड्रीवाल के भीतर बने मिले, जबकि पूरा भुगतान सरकारी धन से किया गया।समिति ने इसे सरकारी धन का दुरुपयोग और नियमों का खुला उल्लंघन माना है।

कागजों में 100 मीटर, जमीन पर 30 मीटर

इंटरलॉकिंग कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी उजागर हुई। अभिलेखों में 100 मीटर लंबाई दर्शाई गई, जबकि मौके पर मात्र 30 से 35 मीटर कार्य पाया गया। शेष लंबाई पूर्व से बने बिटुमिनस मार्ग पर दर्शा दी गई। जांच में लगभग 2.20 लाख रुपये के अतिरिक्त भुगतान की पुष्टि हुई है, जिसे सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता माना गया।

अधूरे कार्य, पूरा भुगतान

भटौली ग्राम पंचायत में रेस्ट रूम निर्माण का मामला भी गंभीर पाया गया। मौके पर छत की ढलाई तक नहीं हुई थी, लेकिन फाल्स सीलिंग,पुट्टी,पेंट जैसे कार्यों का भुगतान पहले ही कर दिया गया। समिति ने इसे स्पष्ट रूप से सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में रखा है।

कुछ कार्य सही, लेकिन सवाल बरकरार

जांच में यह भी सामने आया कि ब्लॉक परिसर में कुछ इंटरलॉकिंग और कार्यालय सौंदर्यीकरण कार्य मानकों के अनुरूप पाए गए। हालांकि, अधिकांश ग्राम पंचायतों में मिली अनियमितताओं ने पूरी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। समिति का मानना है कि चयनात्मक रूप से सही कार्य दिखाकर व्यापक भ्रष्टाचार को ढंकने की कोशिश की गई।
शासन से क्या कार्रवाई मांगी गई
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने शासन से सिफारिश की है कि
ब्लॉक प्रमुख को नियमावली 1997 के नियम-4 के तहत तत्काल पदमुक्त किया जाए।
सरकारी धन के गबन, पद के दुरुपयोग और धोखाधड़ी के मामलों में एफआईआर दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई की जाए।
गलत भुगतान की रिकवरी संबंधित लोगों से कराई जाए।

पृष्ठभूमि में सुशांत गोल्फ सिटी राजधानी लखनऊ एवं अन्य मामलों से जुड़ते तार

गौरतलब है कि हाल के दिनों में सुशांत गोल्फ सिटी, लखनऊ में जमीन कब्जे से जुड़े एक मामले में पीड़ितों को जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज हुआ है, जिसमें बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह का नाम सामने आया। उस प्रकरण में प्रमुख पति का नाम सीधे तौर पर है जो वायरल वीडियो में देखा जा सकता है, लेकिन जौनपुर जिला प्रशासन की यह रिपोर्ट पीड़ित पक्ष की स्थिति को और मजबूत करती मानी जा रही है।

निष्कर्ष

महराजगंज ब्लॉक की यह जांच रिपोर्ट विकास के नाम पर निजी लाभ, अधूरे कार्यों पर पूरा भुगतान और कागजों में सड़कें दिखाने जैसी प्रवृत्तियों को उजागर करती है। भ्रष्टाचार पर “जीरो टारलेंस” के दावों की पोल खुल चुकी है। अब निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या यह रिपोर्ट भी फाइलों में दबकर रह जाएगी?

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