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हमीरपुर: नौ साल पुराने दर्दनाक कत्ल में तीन दोषियों को उम्रकैद और 57 हजार का जुर्माना

जन एक्सप्रेस/हमीरपुर: नौ साल पहले मौदहा कस्बे में हुई दर्दनाक हत्या की घटना के दोषियों को आखिरकार अदालत ने सजा सुनाई। 12 मई 2017 को देवी चौराहे स्थित एक घर में अलग-अलग कमरों में पांच लोगों की नृशंस हत्या की गई थी। इस हत्या के पीछे मकसद था प्रॉपर्टी और पैसों की हड़प।

मृतकों में 70 वर्षीय कृष्ण पाल सिंह, 65 वर्षीय कुसमा देवी, 45 वर्षीय रानी, 23 वर्षीय आकांक्षा और छह महीने की नन्ही मासूम शामिल थीं। मामले की जांच नाती सौरभ सिंह की तहरीर पर शुरू हुई थी, जिसमें उन्होंने बताया कि यह वारदात उनके ननिहाल के रिश्तेदारों ने अपने साथियों के साथ मिलकर की थी।

मौदहा पुलिस ने तुरंत ही जांच शुरू करते हुए जुगुल किशोर पुत्र विजय बहादुर सिंह (पासुन लेवा, थाना सिसोलर), पुष्पेन्द्र सिंह पुत्र झाम सिंह, मूलचन्द्र उर्फ मुल्लू श्रीवास पुत्र बिटोला श्रीवास, और कामता उर्फ अजय सिंह पुत्र मलखान सिंह (खण्डे, मौदहा) के खिलाफ मौदहा कोतवाली में आईपीसी की धाराओं 302/34, 201, 394, 411 के तहत मामला दर्ज किया।

नौ साल लंबी सुनवाई और जांच के बाद, अदालत ने दोषियों के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया। एडीजीसी मणिकर्ण शुक्ल ने बताया कि डकैती अदालत के स्कालर जज अनिल कुमार खरवार ने पुष्पेन्द्र सिंह, मूलचन्द्र उर्फ मुल्लू और कामता उर्फ अजय सिंह को दोषी मानते हुए तीनों को उम्रकैद की सजा और 19-19 हजार रुपये जुर्माना लगाया।

सुनवाई के दौरान चौथा आरोपी जुगुल किशोर की मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए उसके खिलाफ कोई सजा नहीं सुनाई गई।

मौदहा कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर प्रवेन्द्र कुमार सिंह ने इस मामले की जांच पूरी की और अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी मणिकर्ण शुक्ल ने जोरदार पैरवी करते हुए तीनों दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

इस घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया था, क्योंकि मृतक सभी एक ही परिवार के सदस्य थे और वारदात के पीछे सीधे उनके ही रिश्तेदार का हाथ था। नौ साल की लंबी कानूनी लड़ाई और पुलिस जांच के बाद न्याय मिलने से पीड़ित परिवार को कुछ हद तक न्याय की राहत मिली है।

विशेष रूप से, कोर्ट ने इस मामले में सजा और जुर्माने की कार्रवाई करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि परिवारिक मतभेद और संपत्ति के विवाद के लिए हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मौदहा पुलिस और अदालत के इस कठोर निर्णय से क्षेत्र में न्याय की प्रक्रिया पर विश्वास मजबूत हुआ है। वहीं, इस घटना ने लोगों को यह चेतावनी भी दी है कि किसी भी प्रकार की संपत्ति के लालच के लिए हत्या जैसी गंभीर घटनाओं को अंजाम देना कानून के तहत गंभीर परिणाम ला सकता है।

नौ साल की कानूनी प्रक्रिया और सख्त जांच ने यह सुनिश्चित किया कि दोषियों को उनके अपराध के लिए पूरी तरह सजा मिले। इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस की तत्परता दोनों ही सराहनीय मानी जा रही हैं।

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