ममता संस्था ने दी लोगों को ‘पोषण वाटिका’ लगाने की जानकारी
प्रोजेक्ट जागृति-IV के तहत सैकड़ों गांवों में लोगों को किया जागरूक, मौसमी फल-सब्जियों के सेवन और जैविक खेती के लिए प्रेरित किया गया

जन एक्सप्रेस चित्रकूट: चित्रकूट जिले में ममता हेल्थ इंस्टिट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड संस्था द्वारा संचालित ‘प्रोजेक्ट जाग्रति-IV’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पोषण वाटिका लगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। संस्था की टीम ने गांव पडरी, परसौजा, भरतपुर, कौहारी, भभेट, देयुधा, महुलिया, शिवरामपुर और रामनगर ब्लॉक के सैकड़ों गांवों में लोगों को बीज वितरित किए और बताया कि कैसे घर के आसपास, छत पर या खेतों के पास छोटी-सी पोषण वाटिका तैयार कर अपने भोजन को पौष्टिक बनाया जा सकता है।
कीटनाशकयुक्त सब्जियों से बचने पर जोर:
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि बाजार में मिलने वाली रासायनिक कीटनाशकयुक्त सब्जियां हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं।इनके सेवन से भूख में कमी, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या, व्यवहार में बदलाव और त्वचा संबंधी कई बीमारियां हो सकती हैं।इसलिए परिवारों को सलाह दी गई कि वे मौसमी फल, सब्जियां और हरी पत्तेदार सब्जियां अपनी रोज़ की थाली में जरूर शामिल करें।
संतुलित आहार पर दी गई जानकारी:
प्रशिक्षण के दौरान लोगों को बताया गया कि — रोज़ की थाली का एक चौथाई हिस्सा अनाज का होना चाहिए। आधा हिस्सा फल और सब्जियों का होना चाहिए।एक तिहाई हिस्सा प्रोटीनयुक्त आहार जैसे दाल, मांस, मछली या अंडे का होना चाहिए। साथ ही 4-5 चम्मच तेल और चीनी का सीमित उपयोग करने की सलाह दी गई। गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के लिए पोषण वाटिका के महत्व पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। वीडियो के माध्यम से बताया गया कि कैसे छोटी जगहों में भी हरे-भरे पौधे उगाकर पोषण की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।ममता संस्था के इस अभियान की सराहना रामनगर और शिवरामपुर ब्लॉक के चिकित्सा अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह, शिव सिंह, तथा कई ग्राम प्रधानों ने की।
ग्राम प्रधान राजा सिंह (परसौजा), युसूफ अली (साईंपुर), शैलेन्द्र गौरा (सकरौली) और आरती वर्मा (भरतपुर) ने संस्था के प्रयासों को ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।






