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बेटी के कत्ल की साजिश के गुनाहगार पिता को उम्रकैद की सजा

पिता ने दामाद के साथ मिलकर साजिश के तहत अपनी ही बेटी के कत्ल की वारदात को दिया

जन एक्सप्रेस/हमीरपुर: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर के सुमेरपुर में आने वाले टेढ़ा गाँव में 2010 को हुये 15 साल की नाबालिग साधना सिंह नामक युवती के अपहरण के बाद कत्ल की वारदात को अंजाम देने के मामले में चली करीब 15 साल की लम्बी सुनवाई के बाद हमीरपुर की जिला,सत्र अदालत के स्कालर जज रनवीर सिंह ने मृतक युवती के पिता सुभाष सिंह को वारदात की साजिश का गुनाहगार मानते हुये उम्रकैद की सख्त सजा के साथ ही पच्चीस हजार रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जबकि वारदात के दूसरे मुल्जिम छतरपुर निवासी मृतक युवती के पति भूपेन्द्र सिंह की अदालत में चली लम्बी सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। इस सनसनीखेज मामले की अदालत में अभियोजन की तरफ से पैरवी कर रहे एडीजीसी मणिकर्ण शुक्ला ने बताया कि सुमेरपुर थाने में 23 अक्टूबर 2010 को टेढ़ा निवासी सुभाष चन्द्र ने अपनी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी साधना सिंह का दोपहर 12 बजे घर के दरवाजे से गांव के ही दबंग और अपराधी बालेन्द्र प्रताप सिंह,

शिव मंगल सिंह, दलपत सहित ब्रजेश सिंह के खिलाफ अपहरण किये जाने की तहरीर दी थी, जिसके बाद पुलिस ने चारों अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या– 2040/2010 363,3666 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर मुल्जिमों की धरपकड़ के लिये दबिश देना शुरू कर दिया था, जिसके बाद पुलिस के डर से चारों मुल्जिमों ने अदालत में सरेंडर कर दिया था। वही इस सनसनीखेज मामले की गहराई से जांच के दौरान सुमेरपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष व जांच अधिकारी मोहम्मद शरीफ खान के पैरों तले जमीन उस वख्त खिसक गई, जब उन्हें पता चला कि मामले की तहरीर देने वाले पिता ने ही साजिश के तहत अपने दामाद से ही मिलकर बेटी के गले को डुपट्टे से कसकर कत्ल की वारदात को महोबा के बाबू लाल तिवारी नामक व्यक्ति के अरहर के खेत में अंजाम दिलवाया

गया था, जबकि बेटी का पिता साजिश के तहत कत्ल के दौरान दामाद के साथ मौके पर ही मौजूद रहा था। बस इसी जानकारी के

बाद सुमेरपुर पुलिस ने मौकए वारदात पर पहुंच कर 15 साल की नाबालिग साधना सिंह की लाश बरामद करने के साथ ही मृतक युवती की मां से लाश की शिनाख्त भी कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने लाश का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया था, वही पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने दामाद और ससुर से पूरे मामले की गहराई से पूंछताछ की थी, जबकि पूंछताछ के बाद पुलिस ने इस मामले में मृतक युवती के पिता और पति को

मुजरिम मानते हुये जेल भेज दिया था।

वही जांच अधिकारी ने इस मामले में भूपेन्द्र सिंह पुत्र स्वयंवर सिंह निवासी ट्रान्सपोर्ट नगर ओरछा रोड छतरपुर (मध्य प्रदेश),सुभाष चन्द्र सिंह पुत्र स्व० जगरुप सिंह निवासी ग्राम टेढा, सुमेरपुर हमीरपुर के खिलाफ धारा 363,366,302,201,120 बी० के तहत अदालत मे चार्जशीट नम्बर-422/2010 दाखिल कर पिता और पति को ही नाबालिग युवती के कत्ल का जिम्मेदार माना था, हालांकि मृतक युवती के पिता और पति ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुये मुख्य चारों मुल्जिमों से मिलीभगत कर उनके खिलाफ उल्टी कार्यवाही किये जाने का इल्जाम लगाया था। वही आपरेशन कन्विक्शन के तहत हमीरपुर की जिला,सत्र अदालत के स्कालर जज रनवीर सिंह ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद मुजरिम सुभाष सिंह को मामले से जुड़ी दूसरी धाराओं के तहत बेगुनाह मानते हये बरी कर दिया गया है, जबकि धारा-120बी के तहत वारदात की साजिश किये जाने का गुनाहगार मानते हुये उम्रकैद की सख्त सजा के साथ ही पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना किया गया है। जबकि मुल्जिम सुभाष सिंह फिलहाल इस मामले में जमानत पर जेल से बाहर थे।

वही इस मामले के दूसरे मुजरिम भूपेन्द्र सिंह की अदालत में चली पन्द्रह साल की लम्बी सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। जबकि अभियोजन की तरफ से अदालत में अपनी दमदार दलीलें पेश करते हुये एडीजीसी मणिकर्ण शुक्ला ने बचाव पक्ष की दी गई दलीलों की हवा निकालने के साथ ही मामले के मुल्जिम पिता को उम्रकैद की, सख्त सजा के साथ ही 25 हजार रुपये का जुर्माना कराने में बड़ी कामयाबी हासिल की है।

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