नाबालिग लड़की से बलात्कार आरोपी गिरफ्तार

जन एक्सप्रेस/मेरठ/लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक बेहद शर्मनाक घटना सामने आई है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती एक नाबालिग लड़की के साथ अस्पताल के बाथरूम में रेप की घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कौन है पीड़िता?
घटना की शिकार 13 वर्षीय नाबालिग लड़की हाल ही में पैर की सर्जरी के लिए मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुई थी। घटना उस समय की है जब वह दोपहर में अस्पताल के बाथरूम में गई थी। तभी एक युवक, जो अस्पताल में तीमारदार के रूप में मौजूद था, वहाँ घुस आया और उसके साथ जबरन बलात्कार किया।
कौन है आरोपी?
पकड़ा गया आरोपी रोहित नाम का युवक है, जो अस्पताल में भर्ती अपने घायल भाई की देखरेख के लिए आया हुआ था। वह बीते कुछ दिनों से अस्पताल में ही रह रहा था।
परिजनों की शिकायत पर तत्काल अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया और उसे थाने ले जाकर पूछताछ शुरू की।
आरोपी पर दर्ज हुए मामले
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 डी ए (नाबालिग से बलात्कार) और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
मेडिकल जांच व बयान दर्ज
पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और बाल कल्याण समिति की उपस्थिति में बयान भी दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामला संवेदनशील है और तेजी से जांच कर जल्द चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
अस्पताल प्रशासन की सफाई
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और सुरक्षा में हुई चूक की समीक्षा की जा रही है। एक जांच समिति गठित की गई है, जो पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट 48 घंटे में सौंपेगी।
हालांकि परिजनों ने यह आरोप लगाया है कि अस्पताल में न पर्याप्त सुरक्षाकर्मी हैं, न ही महिला रोगियों के लिए अलग और सुरक्षित वॉर्ड।
क्या बोले अधिकारी?
एसएसपी मेरठ ने कहा:
“पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया है। बच्ची की सुरक्षा सर्वोपरि है। ऐसे मामलों में कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”
क्यों है ये घटना चिंताजनक?
• अस्पतालों को लोग इलाज के लिए सुरक्षित स्थान मानते हैं।
• अगर तीमारदार ही ऐसे अपराध करें तो सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी है?
• अस्पतालों में सीसीटीवी, महिला सुरक्षा स्टाफ और प्रवेश नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है।
यह घटना समाज और व्यवस्था दोनों के लिए चेतावनी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इलाज के लिए आए किसी भी मरीज—विशेषकर महिलाओं और बच्चों—की गरिमा और सुरक्षा से कोई समझौता न हो।






