
जन एक्सप्रेस संवाददाता, अल्मोड़ा/चंपावत। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में मानसून का कहर जारी है। अल्मोड़ा और चंपावत जिले भारी वर्षा की चपेट में हैं। मंगलवार रात से हो रही लगातार बारिश के कारण रामगंगा और कोसी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। वहीं, भूस्खलन और मलबा गिरने से दोनों जिलों में कुल 21 सड़कें बंद हो गई हैं। प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की चेतावनी जारी की है।
अल्मोड़ा: 11 सड़कें बंद, नदी-नालों पर नजर
जिले में बीते 24 घंटों में सोमेश्वर क्षेत्र में 136 मिमी वर्षा दर्ज की गई। अन्य क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश हुई है –
चौखुटिया: 75.0 मिमी
रानीखेत: 55.0 मिमी
अल्मोड़ा शहर: 47.0 मिमी
जागेश्वर, शीतलाखेत और अन्य क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा।
कोसी बैराज का डिस्चार्ज 10,272.50 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया है। जलस्तर खतरे के निशान से नीचे बना हुआ है लेकिन स्थिति निगरानी योग्य बनी हुई है। रामगंगा नदी का जलस्तर भी सामान्य से ऊपर है।
सड़क नेटवर्क पर असर:
1 राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-109) बंद
3 राज्य मार्ग (SH-33, SH-14, SH-3) बाधित
6 ग्रामीण सड़कें बंद
कुल 11 सड़कें अवरुद्ध. चंपावत: टनकपुर-घाट हाईवे बंद, शारदा नदी में उफान,चंपावत जिले में बारिश लगातार तीसरे दिन जारी है।,बनबसा में 70 मिमी ,मुख्यालय में 68 मिमी वर्षा दर्ज टनकपुर-घाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्वाला और संतोला के पास भारी मलबा आने से मार्ग बंद है। भूस्खलन जारी है, जिससे मार्ग खोलने में दिक्कतें आ रही हैं। शारदा नदी का बहाव 1.56 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया है, जिससे नदी किनारे बस्तियों में अलर्ट जारी किया गया है।
स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद
चंपावत में 12वीं तक के सभी विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र भारी बारिश के चलते लगातार तीसरे दिन बंद हैं।
प्रशासन की चेतावनी और राहत कार्य जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है: नदी और नालों के समीप न जाएं |भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में न रहें|
स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें विभागीय टीमें मार्ग खोलने में जुटी हुई हैं, लेकिन मौसम की वजह से कार्य में बाधा आ रही है।






