एनएच-74 घोटाला: अफसरों और अपात्रों की साजिश से 400 करोड़ का मुआवजा घपला, 8 PCS अफसर दोषी

जन एक्सप्रेस/देहरादून(उत्तराखण्ड) : उत्तराखंड के सबसे बड़े मुआवजा घोटाले – एनएच-74 चौड़ीकरण घोटाले – में अफसरों और अपात्र व्यक्तियों की साठगांठ से करोड़ों रुपये की सरकारी राशि लूट ली गई। वर्ष 2017 में उजागर हुए इस घोटाले में अब तक की जांच में करीब 400 करोड़ रुपये के घोटाले की पुष्टि हुई है।
एसआईटी और ईडी की संयुक्त जांच में सामने आया कि अफसरों ने कृषि भूमि को नियमों के खिलाफ “अकृषक” (गैर-कृषि) घोषित कर, बड़ी रकम मुआवजे के तौर पर बांटी। इस गड़बड़ी में आठ PCS अधिकारियों को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है, जिनमें से कई को निलंबित भी किया गया।
जिन अधिकारियों पर गाज गिरी उनमें तीरथ पाल सिंह, अनिल शुक्ला, डीपी सिंह, नंदन सिंह नगन्याल, भगत सिंह फोनिया, सुरेंद्र सिंह जंगपांगी और जगदीश लाल शामिल हैं। इसके अलावा दो IAS अफसरों पर भी सवाल उठे, लेकिन बाद में उन्हें शासन से क्लीन चिट दे दी गई।
ईडी की ओर से पांच अगस्त 2022 को PCS अफसर डीपी सिंह, पूर्व एसडीएम भगत सिंह फोनिया, पूर्व तहसीलदार मदन मोहन पाडलिया और फाइबरमार्क्स पेपर्स प्राइवेट लिमिटेड समेत छह लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में चार्जशीट दाखिल की गई।
ईडी कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए माना कि इन सभी आरोपितों ने मुआवजा राशि से करीब 7.99 करोड़ रुपये की मनी लांड्रिंग की। जांच में यह भी सामने आया कि जमीन खरीद-फरोख्त और मूल्यांकन में जानबूझकर अनियमितताएं कर यह अपराध किया गया।
यह घोटाला उस वक्त सामने आया जब एनएच-74 के चौड़ीकरण में ऊधमसिंह नगर की सैकड़ों एकड़ जमीन अधिग्रहण के दायरे में आई। जमीन मालिकों को मुआवजा देने के नाम पर अधिकारियों ने किसानों से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कृषि भूमि को अकृषक दिखाकर अधिक मुआवजा लिया।
मुख्य बिंदु:
- घोटाले की शुरुआत 2017 में हुई, तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में इसकी जांच शुरू हुई।
- जांच में 30 से अधिक लोग गिरफ्तार, जिनमें PCS अधिकारी, किसान और निजी कंपनी के अधिकारी शामिल।
- SIT और ED ने की जांच, कोर्ट में चल रहा मामला।
- अब तक करीब 400 करोड़ रुपये के गबन की पुष्टि।
उत्तराखंड की सियासत और प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर देने वाला यह घोटाला अब न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम पड़ाव में है। सवाल यह भी है कि क्या अब भी सभी दोषियों को सजा मिल पाएगी और क्या जनता के पैसे की भरपाई हो सकेगी?






