चित्रकूट में पहली बार श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन
कथा व्यास केशव शास्त्री ने बताया भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का आध्यात्मिक रहस्य

जन एक्सप्रेस/चित्रकूट: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की तपोस्थली, इन दिनों श्रीमद् भागवत कथा के पावन आयोजन का साक्षी बन रहा है। इस भव्य आयोजन का संयोजन भागवत कथा समिति, बासौदा जिला विदिशा (मध्य प्रदेश) द्वारा किया जा रहा है। समिति भारत के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन में संलग्न है, और चित्रकूट में यह उनका पहला आयोजन है।
कथा वाचन का शुभ कार्य प्रख्यात कथा व्यास श्री केशव शास्त्री (गंज बासौदा, मध्य प्रदेश) कर रहे हैं। कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में छिपे गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने गोपियों के घर से माखन चुराया, जो वास्तव में दूध का सार है। यह संकेत है कि प्रभु सृष्टि के केवल सार तत्व को ही ग्रहण करते हैं और असार को त्याग देते हैं। उनका यह संदेश है कि हमें संसार के नश्वर भोगों में न फंसते हुए, अपने अंदर स्थित परमात्मा की खोज करनी चाहिए।
श्रीकृष्ण थे आत्मा के जागरणकर्ता, केवल सखा नहीं
कथा व्यास श्री शास्त्री ने कहा कि श्रीकृष्ण केवल ग्वाल-बालों के सखा नहीं थे, बल्कि वे उनके आत्मिक गुरु भी थे। उन्होंने न केवल जीवन का आनंद देना सिखाया, बल्कि आत्मा के जागरण का मार्ग भी दिखाया। श्रीकृष्ण ने अपने अनुयायियों को दीक्षित कर उन्हें आत्मिक स्तर पर स्थित रहकर सुंदर, सरल और सच्चा जीवन जीने की प्रेरणा दी।
भागवत कथा के इस आयोजन में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति देखी जा रही है, जो प्रभु की कथाओं के माध्यम से अपने जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा ले रहे हैं। समिति ने इसे भविष्य में अन्य तीर्थ स्थलों पर भी जारी रखने का संकल्प लिया है।






