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एआई के साथ बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर: जौनपुर डायट में तीन दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा को आधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), जौनपुर ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शिक्षक शिक्षा योजना के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ, जिसमें शिक्षकों को भविष्य की तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावी उपयोग के गुर सिखाए गए।

शिक्षा 4.0: 2025 में बदल जाएगा पढ़ाई का अंदाज

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और विषय विशेषज्ञ, बयालसी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार ने “विभिन्न विषयों के शिक्षण में AI का उपयोग” विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एआई तकनीक शिक्षकों के बोझिल प्रशासनिक कार्यों, जैसे:

  • लेसन प्लान (पाठ योजना) बनाना

  • मूल्यांकन रूब्रिक तैयार करना

  • आधिकारिक पत्राचार और ईमेल ड्राफ्टिंग इन कार्यों को सरल बनाकर एक शिक्षक का प्रति सप्ताह 7 से 10 घंटे तक का कीमती समय बचा सकती है। इस बचे हुए समय का उपयोग शिक्षक छात्रों के साथ व्यक्तिगत संवाद और उनकी समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।

ACDQ फ्रेमवर्क और ‘एक्सोस्केलेटन’ तकनीक

डॉ. अनिल कुमार ने शिक्षकों को ACDQ फ्रेमवर्क (Act, Context, Depth, Questions) के बारे में बताते हुए कहा कि यह तकनीक शिक्षकों को अधिक संरचित और प्रभावी पाठ योजना तैयार करने में मदद करती है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात कही:

“एआई कभी भी शिक्षक का विकल्प नहीं बन सकता। यह एक ‘एक्सोस्केलेटन’ (सहायक कवच) की तरह है, जो शिक्षक की क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है और उसे एक ‘स्ट्रैटेजिक मेंटर’ के रूप में स्थापित करता है।”

पर्सनलाइज्ड एजुकेशन और मल्टीमीडिया का जादू

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि एआई के माध्यम से अब वीडियो, ऑडियो और विजुअल आधारित शिक्षण सामग्री (TLM) मिनटों में तैयार की जा सकती है। साथ ही, एआई हर छात्र की सीखने की अलग गति (Learning Speed) के अनुसार शिक्षा को ‘पर्सनलाइज्ड’ करने में सक्षम है।

सावधानी भी है जरूरी

डॉ. कुमार ने शिक्षकों को आगाह भी किया कि एआई का उपयोग केवल एक सहायक उपकरण के रूप में ही करें। उन्होंने जोर दिया कि छात्रों की आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और रचनात्मकता पर इसका नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।

प्रशासनिक सराहना

उप शिक्षा निदेशक (डायट, जौनपुर) ने डॉ. अनिल कुमार के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी नवाचारों को अपनाना अनिवार्य है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रशिक्षण जौनपुर की शिक्षा व्यवस्था को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

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