डकैत की बरसी पर स्कूली बच्चों से राजनीति!
मानिकपुर में भंडारे की आड़ में बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़, प्रशासन मौन!

जन एक्सप्रेस/चित्रकूट : कभी पूरे बुंदेलखंड में आतंक का पर्याय रहे डकैत ददुआ की बरसी पर अब राजनीति की नई इबारत लिखी जा रही है — वो भी स्कूली बच्चों के भविष्य की कीमत पर। सपा के पूर्व विधायक वीर सिंह पटेल द्वारा ऐलहा बढ़ैया में आयोजित भव्य भंडारे में न सिर्फ राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन हुआ, बल्कि प्राइमरी स्कूल के मासूम बच्चों को भी स्कूल ड्रेस में बुलाकर भंडारे का हिस्सा बना लिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बच्चों को पढ़ाई के दौरान स्कूल से उठाकर भंडारे में ले जाया गया — और वह भी बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के!
बच्चे गए भंडारे में, स्कूल में मिड-डे मील की फर्जी हाजिरी?
ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल से सभी बच्चों को कार्यक्रम में ले जाया गया, जहां उन्हें भंडारा परोसा गया। उसी दिन मिड-डे मील स्कूल में नहीं बना, लेकिन हाजिरी मिड-डे मील रजिस्टर में पूरी लगा दी गई। अब बड़ा सवाल — क्या बच्चों ने दो बार खाना खाया या फिर सरकारी योजना में घोटाला हुआ?
बिना अनुमति के ले जाया गया बच्चों को – एबीएसए का कबूलनामा
इस मामले पर जब खंड शिक्षा अधिकारी (ABSA), मानिकपुर से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि बच्चों को बिना पत्राचार और अनुमति के भंडारे में ले जाया गया, जो नियमों का घोर उल्लंघन है। उन्होंने कहा, “यदि कोई संस्था या व्यक्ति बच्चों को ले जाना चाहता है तो पूर्व अनुमति जरूरी होती है। यह गंभीर लापरवाही है।”
डकैत की बरसी में शिक्षा का अपहरण?
इस आयोजन में जिस प्रकार ददुआ जैसे कुख्यात डकैत की बरसी पर बच्चों को “राजनीतिक तमाशे” में शामिल किया गया, उससे सवाल उठता है — क्या अब डकैतों की विरासत को मासूमों के ज़रिए राजनीतिक वैधता दिलाई जाएगी?
विपक्ष पहले ही सपा नेताओं पर अपराधियों को महिमामंडित करने का आरोप लगाता रहा है। अब बच्चों को मंच का हिस्सा बनाना, वोट बैंक की राजनीति का नया और बेहद खतरनाक ट्रेंड साबित हो रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल
इतना सबकुछ होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन की खामोशी भी शक के घेरे में है। न तो किसी शिक्षक पर कार्रवाई हुई और न ही आयोजनकर्ता से जवाबतलबी। आखिरकार, अगर उस दिन बच्चों के साथ कोई हादसा हो जाता — तो जिम्मेदार कौन होता?
बड़े सवाल जो सरकार और समाज दोनों से हैं:
- क्या डकैत की बरसी बच्चों के लिए प्रेरणा बननी चाहिए?
- क्या शिक्षा का मंदिर अब राजनीति का मंच बनता जा रहा है?
- क्या मिड-डे मील और स्कूल की व्यवस्था को भी भोग समारोह बना दिया गया है?
- क्या यह घटना बच्चों के मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन नहीं?
अब कार्रवाई से कम कुछ मंजूर नहीं!
प्रदेश में कानून व्यवस्था और शिक्षा की मर्यादा को लेकर योगी सरकार सख्त छवि के लिए जानी जाती है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
जनता पूछ रही है — क्या अब राजनीति के लिए बच्चों को भी मोहरा बनाया जाएगा?






