चित्रकूट में ‘मध्यस्थता अभियान 2.0’ की समीक्षा, 850 वाद चिन्हित, 54 में हुआ समझौता

जन एक्सप्रेस/चित्रकूट।उच्चतम न्यायालय एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार चल रहे ‘मध्यस्थता अभियान 2.0’ के तहत जनपद में वाद चिन्हांकन की तिथि 21 मार्च 2026 तक बढ़ा दी गई है। इसी क्रम में जनपद न्यायाधीश शेषमणि शुक्ला की अध्यक्षता में सभी न्यायिक अधिकारियों की आवश्यक बैठक आयोजित की गई।बैठक में विभिन्न न्यायालयों से मध्यस्थता हेतु संदर्भित वादों की समीक्षा की गई। समीक्षा में सामने आया कि अब तक कुल 850 वाद चिन्हित किए जा चुके हैं, जिनमें से 54 वादों में पक्षकारों के बीचसुलह-समझौता हो चुका है। जनपद न्यायाधीश ने सभी न्यायिक अधिकारियों को अधिक से अधिक वाद मध्यस्थता केंद्र चित्रकूट में भेजने के निर्देश दिए।
इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चित्रकूट के मार्गदर्शन में सचिव इला चौधरी द्वारा जिला कारागार चित्रकूट का निरीक्षण किया गया तथा विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।निरीक्षण के दौरान जेल लीगल एड क्लीनिक के रजिस्टरों का अवलोकन किया गया और पैरालीगल वालंटियर्स को नियमित प्रविष्टियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। महिला बैरक के निरीक्षण में 16 महिला बंदी पाई गईं, जिनसे उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली गई। किसी भी बंदी ने विशेष समस्या नहीं बताई। बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता, जेल अपील और लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से सहायता प्राप्त करने की जानकारी दी गई।विधिक साक्षरता कार्यक्रम के दौरान बंदियों को बताया गया कि राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर विधिक सेवा प्राधिकरण जरूरतमंदों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करते हैं। जिन बंदियों की जमानत हो चुकी है लेकिन रिहाई शेष है, उनके मामलों में आवश्यक कार्यवाही पर बल दिया गया। साथ ही 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के बंदियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली गई और संबंधित योजनाओं के बारे में अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में जिला कारागार के अधीक्षक कुश कुमार सिंह, जेलर कौशलेन्द्र सिंह, सहायक न्याय रक्षक योगेन्द्र सिंह व कुलदीप सिंह सहित अन्य कारागार कर्मी उपस्थित रहे।यह पहल जनपद में न्याय सुलभ कराने, मामलों के त्वरित निस्तारण और बंदियों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।






