चित्रकूट के मौहापुर में सड़क का संकट: आज़ादी के बाद भी नहीं बनी पक्की सड़क, बरसात में कटा रहता है गांव का रास्ता!
सरकार के कागज़ों में “विकसित गांव”, ज़मीनी हक़ीक़त में कीचड़ और धूल से जूझते लोग – बोले ग्रामीण: हमें हाईवे नहीं, अपने गांव की राह चाहिए!

जन एक्सप्रेस चित्रकूट।(हेमनारायण हेमू):मानिकपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत ऐलहा बढ़ैया माजरा मौहापुर के लोगों के लिए सड़क अब भी सपने से कम नहीं। सरकार भले ही गांवों को विकास की रोशनी में नहाया हुआ बताती हो, लेकिन हकीकत यह है कि मौहापुर के लोग आज भी सड़क विहीन जीवन जीने को मजबूर हैं। बरसात आते ही यह गांव चारों तरफ से कीचड़ और गड्ढों में घिर जाता है। न बच्चों को स्कूल जाने का रास्ता मिलता है, न बीमारों को अस्पताल तक पहुँचाना आसान होता है।ग्रामीण होरीलाल ने सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा — “हमें सरकार के हाईवे से क्या मतलब? हम गरीब लोग तो साइकिल और पैदल ही चलते हैं। लेकिन हमें तो वो भी रास्ता नसीब नहीं है। हाईवे पर तो मंत्री और नेता चलते हैं, हमारे लिए तो गांव की सड़क ही हमारा हाईवे है!”
गांव वालों का कहना है कि आज़ादी के 75 साल बीत जाने के बाद भी अब तक पक्की सड़क नहीं बनी। हर साल अधिकारी जांच करने आते हैं, तस्वीरें खिंचती हैं, वादे किए जाते हैं, लेकिन सड़क वहीं की वहीं रह जाती है। बारिश के मौसम में कीचड़ से रास्ते बंद हो जाते हैं और किसी के बीमार पड़ने पर लोग चारपाई पर लादकर मीलों दूर अस्पताल तक पहुंचाने को मजबूर होते हैं। गांव के अन्य लोगों ने भी नाराज़गी जताते हुए कहा कि सरकार “आखिरी छोर तक विकास” की बात तो करती है, मगर हकीकत में ऐलहा बढ़ैया माजरा मौहापुर जैसे गांव आज भी उपेक्षा की अंधेरी गलियों में भटक रहे हैं। नालियों में गंदगी, टूटी सड़कें और जलजमाव ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है।जन एक्सप्रेस की टीम जब गांव पहुंची तो हालात देखकर साफ़ झलक गया कि विकास के सरकारी दावों की पोल यहां की टूटी सड़कें खुद बयां कर रही हैं।






