जन एक्सप्रेस | जौनपुर
पिछले दो दिन पूर्व पुलिस लाइन जौनपुर में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री तथा जनपद प्रभारी मंत्री एके शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय प्रशासनिक एवं भाजपा समन्वय समिति की बैठक उस समय हंगामेदार हो गई, जब संगठन और प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक खुलकर सामने आ गई। बैठक के दौरान एक भाजपा नेता एवं पूर्व प्रत्याशी को बाहर का रास्ता दिखाए जाने से माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
बैठक की शुरुआत से ही दिखने लगे तल्खी के संकेत
बैठक की शुरुआत सामान्य रही, लेकिन कुछ ही देर में माहौल बदल गया। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी ने बैठक में शामिल लोगों की वैधता पर सवाल खड़े करते हुए प्रभारी मंत्री से पूछा कि समिति की बैठक में किन-किन लोगों को शामिल होने का अधिकार है। उन्होंने इस संबंध में अधिकृत सूची प्रस्तुत करने की मांग की।
सूची पढ़ते ही भाजपा नेता को बाहर जाने का निर्देश
प्रभारी मंत्री एके शर्मा ने जिलाधिकारी से सूची मंगवाई और उसे बैठक में सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाया। सूची पढ़े जाने के बाद एक भाजपा नेता एवं पूर्व प्रत्याशी का नाम सामने आने पर उन्हें बैठक से बाहर जाने का निर्देश दिया गया। इस कार्रवाई से कई पार्टी पदाधिकारी असहज नजर आए और बैठक में खुसुर-फुसुर शुरू हो गई।
ग्राम पंचायत सचिव का मामला बना विवाद की जड़ का कारण
इसके बाद बैठक में ग्राम पंचायत सचिव के स्थानांतरण का मुद्दा छा गया। सांसद सीमा द्विवेदी ने आरोप लगाया कि जिस ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ उन्होंने भ्रष्टाचार की शिकायत दस से अधिक बार जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी से की थी, उस पर कार्रवाई करने के बजाय उसका कार्यक्षेत्र बढ़ा दिया गया। उन्होंने इसे प्रशासन की लापरवाही बताते हुए जिलाधिकारी से सीधे जवाब मांगा।
प्रमुख सचिव का नाम पूछते ही बढ़ा तनाव
जिलाधिकारी ने जवाब में एक प्रमुख सचिव और एक भाजपा नेता की संस्तुति का हवाला दिया, हालांकि नाम बताने से बचते रहे। यह सुनते ही सांसद सीमा द्विवेदी नाराज हो गईं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि प्रमुख सचिव का नाम बताया जाए, ताकि वह स्वयं उनसे बात कर सकें। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब तक इस मामले का समाधान नहीं होगा, बैठक आगे नहीं बढ़ेगी।
प्रभारी मंत्री ने स्थिति संभलने की कोशिश, लेकिन नहीं मानी सांसद
प्रभारी मंत्री ने माहौल शांत करने और विषय बदलने का प्रयास किया, लेकिन सांसद अपने रुख पर अड़ी रहीं। उनके सख्त तेवर देखकर बैठक में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया और पूरा वातावरण तनावपूर्ण हो गया।
समन्वय की बैठक में उभरे कई सवाल?
हालांकि बैठक का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों पर चर्चा करना था, लेकिन इस घटनाक्रम ने बैठक की दिशा ही बदल दी। पूरे प्रकरण ने भाजपा के अंदरूनी समीकरणों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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