उत्तराखंड

कार्यशाला में जल की गुणवत्ता के लिए जल की सुरक्षा पर बल

नैनीताल । जिला मुख्यालय के निकट पटवाडांगर स्थित उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद में क्षेत्रीय जल गुणवत्ता अनुश्रवण और प्रबंधन प्रशिक्षण विषय पर रविवार को हुई कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए कुमाऊं विश्वविद्यालय के शोध निदेशक प्रो. ललित तिवारी ने शुद्ध जल को अच्छे स्वास्थ्य एवं सबसे बड़ी ऊर्जा का परिचायक बताया। उन्होंने जनमानस को निरोगी रहने के लिए जल की सुरक्षा और गुणवत्ता के लिए कटिबद्ध होने का आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि के रूप में पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के एमेरिटस प्रोफेसर डॉ. वीर सिंह ने जल को जीवन का प्रतीक बताया। उन्हाेंने कहा कि जहां जल है वहीं जीवन है। अन्य वक्ताओं ने भी विचार रखे। प्रशिक्षण कार्यशाला के तकनीकी सत्र में उत्तराखंड जल संस्थान रुद्रपुर के कैमिस्ट भुवन कुकरेती और फील्ड मैनेजर रजत मैठाणी ने प्रतिभागियों को फील्ड टेस्टिंग किट के जरिए जल गुणवत्ता जांच की तकनीकियां बताईं।

इस दौरान प्रतिभागियों को 10 रासायनिक व जैविकीय जल गुणवत्ता मानकों की सही तरीके से जांच करने के लिए प्रशिक्षित किया गया। कार्यशाला में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। संचालन वैज्ञानिक डॉ. सुमित पुरोहित और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मणिन्द्र मोहन ने किया।

इससे पूर्व डॉ. तिवारी ने डॉ. वीर सिंह, डॉ. आरके श्रीवास्तव, डॉ. एचजे शिव प्रसाद, डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. सुमित पुरोहित और डॉ. मणिन्द्र मोहन के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।

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