मंदाकिनी पुनर्जीवन पर चित्रकूट-सतना प्रशासन की संयुक्त समीक्षा बैठक

जन एक्सप्रेस, चित्रकूट:मां मंदाकिनी नदी और कामदगिरि पर्वत के प्राकृतिक स्वरूप को पुनः स्थापित करने और संरक्षण के उद्देश्य से महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, सतना में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता मंडलायुक्त रीवा बी.एस. जामोद ने की। इस दौरान चित्रकूट के जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. और सतना के जिलाधिकारी डॉ. सतीश कुमार एस. सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मंडलायुक्त ने बैठक में स्पष्ट किया कि मंदाकिनी नदी और कामदगिरि पर्वत उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश, दोनों की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान हैं, जिनका संरक्षण वैज्ञानिक और समन्वित दृष्टिकोण से किया जाना आवश्यक है। नदी में गिरने वाले नालों की पहचान, वन विभाग की भूमि, घनी वनस्पति और राजस्व भूमि के ब्योरे के साथ व्यापक कार्ययोजना पर ज़ोर दिया गया।
वृक्षारोपण पर भी ज़ोर दिया गया। सतना जिले में 2.75 लाख पौधे और चित्रकूट में 1.61 लाख पौधे नदी किनारे लगाए जाने की योजना है। अब तक 60,000 गड्ढे तैयार किए जा चुके हैं, और 7 प्रमुख स्थलों पर वृहद वृक्षारोपण किया जाएगा। ग्राम वनों और किसानों को फलदार पौधों के वितरण पर भी चर्चा हुई।
मां मंदाकिनी की सफाई को लेकर अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग ने बताया कि एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शोध के लिए आईआईटी रुड़की भेजा गया है। नगर पालिका कर्वी के अधिशासी अधिकारी ने बताया कि नगर क्षेत्र में 10 नालों पर जाली लगाई गई है और कुछ की टैपिंग कराई गई है।
मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि होटल व अन्य प्रतिष्ठानों के सीवेज निस्तारण की भी समीक्षा होगी और संबंधित ग्राम प्रधानों को शामिल कर संयुक्त बैठकों के माध्यम से जागरूकता और कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी।
बैठक में प्रभागीय वन अधिकारी, मनरेगा डीसी, जिला पंचायत अधिकारी, तथा सिंचाई और राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।






