उत्तराखंड

उत्तराखंड में लंबित मांगों को लेकर शिक्षकों का प्रदेशभर में सड़कों पर प्रदर्शन

जन एक्सप्रेस/उत्तराखंड: उत्तराखंड में शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर उबाल लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को प्रदेश भर के राजकीय शिक्षक संघ से जुड़े शिक्षक पदोन्नति और तबादलों में देरी के विरोध में सड़कों पर उतर आए। परेड ग्राउंड से प्रारंभ होकर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने वाले शिक्षकों को पुलिस ने हाथीबड़कला चौकी के पास रोक दिया। इस स्थिति में शिक्षक वहीं धरने पर बैठ गए। देर शाम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हुई वार्ता के बाद ही शिक्षकों ने धरना समाप्त किया।

प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक परेड ग्राउंड में इकट्ठा हुए। उन्होंने लंबित मांगों को लेकर नारेबाजी करते हुए कनक चौक होते हुए बहल चौक के पास पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री आवास से शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया गया। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके सामने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों के निपटारे के लिए एक सप्ताह के भीतर सचिव कार्मिक की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की जाएगी। वार्ता के आश्वासन के बाद शिक्षकों ने धरना समाप्त किया।

धरने के दौरान शिक्षक और पुलिस के बीच कई जगह नोकझोंक भी हुई। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत शिक्षक समूह को आगे बढ़ने से रोका। बावजूद इसके शिक्षक जिद पर अड़े रहे और राजपुर रोड होते हुए सीएम आवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया। इस आंदोलन में राजकीय शिक्षक संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल रहे, जिनमें प्रांतीय अध्यक्ष राम सिंह चौहान, महामंत्री रमेश पैन्युली, उपाध्यक्ष राजकुमार चौधरी, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष श्याम सिंह सरियाल, मंडल मंत्री हेमंत पैन्युली, कुमाऊं मंडल अध्यक्ष गोकुल मर्तोलिया, मंडल मंत्री डॉ. रविशंकर गुसाई, आलोक रौथाण, प्रवीन रावल, प्रणय बहुगुणा, डॉ. सोहन माजिला, नागेंद्र पुरोहित और अर्जुन पंवार शामिल थे। कई शिक्षक, जो सीएम आवास कूच के लिए देहरादून आ रहे थे, उन्हें पुलिस ने जिले की सीमा पर रोक दिया। इस वजह से कई शिक्षक देहरादून तक नहीं पहुंच पाए और आंदोलन में शामिल नहीं हो सके।

मुख्यमंत्री के साथ शिक्षकों की वार्ता में कई अहम मुद्दे उठाए गए। शिक्षकों ने मांग की कि:

  • प्रधानाचार्य विभागीय सीधी भर्ती को रद्द किया जाए।
  • शिक्षकों की पदोन्नति सूची जल्द जारी की जाए।
  • छात्र-छात्राओं को मुफ्त पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जाए।
  • शिक्षकों को 13 दिन का मातृ-पितृ अवकाश प्रदान किया जाए।
  • शिक्षकों के तबादले किए जाएं।
  • शिक्षकों को बीएलओ डयूटी से मुक्त रखा जाए।
  • चयनित और प्रोन्नत वेतनमान पर वेतनवृद्धि दी जाए।
  • चयनित और प्रोन्नत वेतनमान स्वीकृत किया जाए।
  • पदोन्नत शिक्षकों की पूर्व सेवा जोड़कर चयन और प्रोन्नत वेतनमान दिया जाए।

राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि लंबित मांगों पर कार्रवाई नहीं होने तक शिक्षक आंदोलन जारी रखेंगे। आज प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक में आंदोलन की आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षकों में प्रशासनिक देरी और उनकी मांगों के लंबित रहने के कारण गहरा असंतोष है। आंदोलन न केवल पदोन्नति और तबादलों तक सीमित है, बल्कि शिक्षकों की समग्र स्थिति, बच्चों के अधिकार और कार्य की गुणवत्ता से भी जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार के लिए यह संदेश है कि शीघ्र और ठोस कदम उठाए बिना शिक्षक समुदाय का विरोध और गहरा सकता है। इस प्रकार, प्रदेश के शिक्षकों ने अपनी मांगों और अधिकारों के लिए सशक्त और संगठित प्रदर्शन किया, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ा और मुख्यमंत्री के साथ वार्ता की दिशा में पहला कदम उठाया गया।

 

 

 

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