जन एक्सप्रेस। जौनपुर
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के सुईथाकला विकास खंड में क्षेत्र पंचायत निधि से होने वाले विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला पुनः सामने आया है। आरोप है कि क्षेत्र पंचायत सदस्यों की विधिवत बैठक कराए बिना ही करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के टेंडर प्रकाशित कर दिए गए और फर्जी भुगतान की भूमिका तैयार की जा रही है। मामला उजागर होने के बाद क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने शुक्रवार को जिलाधिकारी दिनेश प्रताप सिंह से मिलकर शिकायत दर्ज कराई।
पहले भी हुआ था 45 कार्यों का विवादित टेंडर
जानकारी के अनुसार 14 सितंबर 2025 को सुईथाकला ब्लॉक द्वारा 45 विकास कार्यों का टेंडर जारी किया गया था। नियमानुसार इसके पहले क्षेत्र पंचायत की बैठक बुलाकर प्रस्ताव पारित होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसे पंचायती राज अधिनियम का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। शिकायत के बाद 6 अक्तूबर 2025 को निविदा प्रक्रिया स्थगित कर तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई थी और 6 दिसंबर को पूरा टेंडर निरस्त कर दिया गया था।
निरस्तीकरण के बाद फिर शुरू हुआ खेल
हैरानी की बात यह है कि 29 दिसंबर 2025 को पुराने कार्यों को दोबारा जोड़ते हुए कुल 84 कार्यों का नया टेंडर निकाल दिया गया। इस बार भी न तो बैठक हुई और न कोई नया प्रस्ताव पारित किया गया। टेंडर की अंतिम तिथि 19 जनवरी 2026 तय की गई, लेकिन यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि निविदा किस समाचार पत्र में प्रकाशित हुई। शुरुआत में सूचना ब्लॉक कार्यालय पर भी चस्पा नहीं की गई। मामला सोशल मीडिया पर उछलने के बाद आनन-फानन में नोटिस लगाया गया।
जांच के नाम पर लीपापोती के आरोप
8 जनवरी 2026 को खंड विकास अधिकारी ने दो सदस्यीय जांच टीम बनाकर तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा, लेकिन न तो मौके पर जांच हुई और न ही कोई आख्या प्रस्तुत की गई। इससे प्रशासनिक नीयत पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए रची गई है।
निजी लाभ के कार्यों का आरोप
क्षेत्र पंचायत सदस्यों का कहना है कि पूर्व में कराए गए कई कार्य निजी बाउंड्रीवॉल और व्यक्तिगत रास्तों तक सीमित रहे। वर्तमान टेंडर में भी ऐसे ही कार्य शामिल हैं। कुछ काम ऐसे हैं जिनका भुगतान पहले ही ग्राम प्रधान निधि से हो चुका है, अब उन्हीं कार्यों को क्षेत्र पंचायत से दिखाकर दोबारा भुगतान कराने की तैयारी है।
टेंडर फॉर्म वितरण में भी मनमानी
ठेकेदारों का आरोप है कि टेंडर फॉर्म लेने जाने पर उन्हें यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि संबंधित बाबू उपलब्ध नहीं हैं। इससे निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पूरी तरह संदिग्ध हो गई है।
डीएम ने गठित की नई जांच टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी दिनेश प्रताप सिंह ने जिला परियोजना अधिकारी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच आख्या तलब की है। क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने मांग की है कि वर्तमान टेंडर तत्काल निरस्त कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और विधिवत बैठक के बाद ही नई प्रक्रिया शुरू हो।
अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि करोड़ों के इस खेल पर अंकुश लगेगा या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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