पत्रकारों की सुरक्षा पर उठे सवाल, डीजीपी को पत्र लिखकर समिति ने जताई गंभीर चिंता
उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति ने पुलिस विभाग की लापरवाही पर जताया ऐतराज, निर्देशों के पालन की मांग

जन एक्सप्रेस लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति ने प्रदेश में पत्रकारों पर बढ़ते हमलों और पुलिस विभाग की अनदेखी को लेकर राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
2017 से अब तक निर्देश जारी, फिर भी पालन में कोताही
समिति के प्रदेश महासचिव अरुण कुमार त्रिपाठी द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2017 से लेकर अब तक कई बार पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर पत्र जारी किए गए, लेकिन स्थानीय पुलिस अधिकारियों द्वारा इनका पालन नहीं किया जा रहा।
विशेष रूप से पत्र संख्या डीजी-8-140(25)/2017-2019/8985 दिनांक 27 अगस्त 2024 का भी हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इसकी अनुपालना में भी लापरवाही बरती गई है।
पत्र की प्रमाणित प्रतियां मांगी गईं
समिति ने DGP से इन सभी पत्रों की प्रमाणित प्रतियां ईमेल के माध्यम से उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है, ताकि पत्रकार समुदाय को यह जानकारी मिल सके कि क्या निर्देश दिए गए थे और उनका कितना पालन हुआ।
अनुपालन न करने वाले अफसरों पर हो सख्त कार्रवाई
पत्र में महासचिव त्रिपाठी ने यह भी लिखा है कि यदि पुलिस अधिकारी उच्चस्तरीय निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।उन्होंने मांग की कि सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों व वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
पत्रकारों की सुरक्षा लोकतंत्र की बुनियाद
समिति के संरक्षक अशोक कुमार नवरत्न, उपाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह, और कार्यकारिणी सदस्य विजय यादव सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी पत्र के माध्यम से अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है।
उनका मानना है कि पत्रकार जनता और शासन के बीच सेतु का कार्य करते हैं, और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासनिक जिम्मेदारी है।
वरिष्ठ पत्रकारों ने किया समर्थन
वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया विशेषज्ञों ने इस कदम को सकारात्मक पहल करार दिया है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए, तो पत्रकारों की निर्भीकता और निष्पक्षता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें
पत्रकार संगठन की यह पहल एक ओर जहां पत्रकार सुरक्षा की आवाज बुलंद करती है, वहीं अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि पुलिस मुख्यालय से क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।






