उत्तराखंडहरिद्वार

शांति, सह-अस्तित्व और संस्कृति का संगम: शांतिकुंज पहुँचे वैश्विक शांति दूत अब्दुल्ला अल मन्नई

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में उन्नयन समारोह में लिया भाग, भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रासंगिकता की की प्रशंसा

जन एक्सप्रेस हरिद्वार: अखिल विश्व गायत्री परिवार के मुख्यालय शांतिकुंज और देव संस्कृति विश्वविद्यालय में सोमवार को एक ऐतिहासिक क्षण साक्षात हुआ जब बहरीन स्थित द किंग हमद ग्लोबल सेंटर फॉर पीसफुल को-एग्ज़िस्टेंस के कार्यकारी निदेशक और वैश्विक शांति दूत श्री अब्दुल्ला अल मन्नई ने संस्थान का औपचारिक दौरा किया।इस आत्मीय और गरिमामय मुलाकात ने भारत और बहरीन के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत की।

“युवाओं में है वैश्विक नेतृत्व की क्षमता” – अब्दुल्ला अल मन्नई

शांतिकुंज एवं विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने अब्दुल्ला अल मन्नई का पारंपरिक स्वागत करते हुए उन्हें संस्थान की शिक्षात्मक, आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियों से परिचित कराया।

अतिथि ने विश्वविद्यालय के छात्रों से संवाद करते हुए कहा,

आप केवल भारत के नहीं, बल्कि आने वाले समय के वैश्विक नेता हैं। आपके संस्कार और सोच विश्व में शांति, सहअस्तित्व और सहयोग की नींव रखेंगे।” उन्होंने शांतिकुंज के कार्यों की प्रशंसा करते हुए इसे “मानवता का प्रेरणास्रोत” बताया।

‘उन्नयन’ समारोह में भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन

अब्दुल्ला अल मन्नई ने विश्वविद्यालय के नवप्रवेशी छात्रों के स्वागत हेतु आयोजित “उन्नयन समारोह” में भी हिस्सा लिया। इस सांस्कृतिक आयोजन में भारतीय परंपराओं, शास्त्रीय प्रस्तुतियों, वैदिक अनुष्ठानों और लोक-कलाओं के माध्यम से देश की गहन सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया गया।

उन्हें भारतीय संस्कृति की गहराई और सार्वभौमिकता ने गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि

भारतीय संस्कृति में निहित सह-अस्तित्व और विश्वबंधुत्व का विचार आज की विश्वव्यापी चुनौतियों के लिए एक समाधान है।”

बहरीन के श्रीनाथ मंदिर के संरक्षण में योगदान का हुआ उल्लेख

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. चिन्मय पंड्या ने बहरीन स्थित लगभग 220 वर्ष पुराने श्रीनाथ मंदिर के संरक्षण में अब्दुल्ला अल मन्नई की भूमिका की सराहना की।

उन्होंने कहा, यह मंदिर भक्ति, अंतरधार्मिक सौहार्द्र और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, और अल मन्नई जी ने इसके संरक्षण में जो योगदान दिया है, वह विश्वबंधुत्व की मिसाल है।”

‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ को वैश्विक पहचान देने की दिशा में प्रयास

डॉ. पंड्या ने कहा कि शांतिकुंज और देव संस्कृति विश्वविद्यालय, पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के मार्गदर्शन में विश्वशांति, नैतिक शिक्षा और संस्कृति के पुनर्जागरण हेतु समर्पित हैं।

इस अवसर पर अल मन्नई ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह संस्थान सिर्फ शिक्षा नहीं, बल्कि सेवा, नैतिकता और वैश्विक भाईचारे के संस्कार दे रहा है।”

भारत-बहरीन संबंधों को मिला नया आध्यात्मिक आयाम

यह भेंट भारत और बहरीन के बीच राजनयिक संबंधों से आगे बढ़कर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव की ओर संकेत करती है। इस मुलाकात को वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की प्रतिष्ठा को सशक्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

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