उत्तर प्रदेश

अमर सिंह की विरासत को सलाम: आज़मगढ़ में मूर्ति स्थापना की उठी मांग, क्षत्रिय महासभा अभियान के लिए तैयार

जन एक्सप्रेस।आजमगढ़

ठाकुर अमर सिंह की पांचवीं पुण्यतिथि पर आजमगढ़ में एकता, श्रद्धा और आत्ममंथन का अद्वितीय संगम देखने को मिला देश भर से आए क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधियों और अमर सिंह के अनुयायियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह ने अमर सिंह के योगदान को याद करते हुए कहा –

महासभा को अमर सिंह का योगदान हमेशा याद रखना चाहिए। आज़मगढ़ में उनकी प्रतिमा लगनी चाहिए, हम सहयोग करेंगे।”

चेतना रथ यात्रा की ऐतिहासिक यादें

कुंवर हरिवंश सिंह ने 2010 में अमर सिंह के नेतृत्व में निकाली गई चेतना रथ यात्रा को यादगार बताया, जिसका समापन 28 मार्च को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में हुआ था। इस आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले राघवेंद्र सिंह राजू ने भी कहा कि यह यात्रा क्षत्रिय समाज के आत्मगौरव और जागरूकता का प्रतीक बनी।

क्या भारत हिन्दू राष्ट्र बनेगा? ‘रामराज्य केसरिया यात्रा’ की तैयारी पर बड़ा संकेत

मीडिया से खुलकर बातचीत करते हुए कुंवर हरिवंश सिंह ने कई सवाल खड़े किए:

क्या भारत एक राष्ट्र, एक नाम, एक संविधान वाला हिंदू राष्ट्र बन सकेगा?”

उनके अनुसार, इतिहास गवाह है कि जब देश पर इस्लामिक हमलावरों का आक्रमण हुआ, तब केवल राजपूतों ने अपने प्राणों की आहुति देकर सनातन धर्म की रक्षा की। उनका कहना था:

राजपूतों ने न सिर्फ देश की अस्मिता की रक्षा की, बल्कि आजादी के बाद अपनी रियासतें और ठिकाने छोड़कर देश की एकता को सर्वोपरि रखा।”

लोकतंत्र में आज महिला असुरक्षित, रियासतों में नहीं थी एक भी एफआईआर”

कुंवर हरिवंश सिंह ने कहा कि:

 “1857 से 1947 तक एक भी रियासत में बलात्कार, दुष्कर्म जैसी कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई। आज लोकतंत्र में महिला असुरक्षा चरम पर है। क्या यह लोकतंत्र की देन है?”

राजनीति में क्षत्रिय उपेक्षित: 1980 में 139 विधायक, आज सिर्फ 51

राघवेंद्र सिंह राजू ने राजनीति में क्षत्रियों की गिरती स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा:

1980 में कांग्रेस के 139 विधायक राजपूत थे।

2012 में सपा ने 52 टिकट दिए, 45 विधायक जीते।

2024 में स्थिति इतनी बदतर कि मात्र 51 राजपूत विधायक उत्तर प्रदेश में रह गए।

राजू का सवाल था:

क्या यह अनदेखी सत्ता की साजिश है? हमसे रियासतें ली गईं, वादे किए गए, पर अब हमारा सम्मान कहाँ है।

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