हरदोई: गंगा किनारे मिले शव का रहस्य गहराया, मृतक का मोबाइल 18 दिन बाद भी ‘ऑनलाइन’, पुलिस पर लापरवाही के आरोप

जन एक्सप्रेस/हरदोई: जनपद के अरवल थाना क्षेत्र में करीब डेढ़ माह पूर्व कुसुमखोर गंगा पुल के नीचे मिले उपकार राजपूत के शव के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। परिजनों का दावा है कि जिस मोबाइल को पुलिस अब तक बरामद नहीं कर सकी है, वह मौत के 18 दिन बाद भी सोशल मीडिया पर ‘ऑनलाइन’ दिखाई दे रहा है। इस खुलासे ने मामले में हत्या की आशंका को और प्रबल कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
खद्दीपुर चैनसिंह निवासी अरविंद कुमार ने बीती 13 फरवरी 2026 को अपने पुत्र उपकार राजपूत की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तीन दिन बाद, 16 फरवरी को उपकार का शव कुसुमखोर गंगा पुल के नीचे संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। मौके से मृतक के ट्रैक्टर की चाबी तो मिली, लेकिन उसका कीमती मोबाइल फोन गायब था।
डिजिटल सुराग: 6 मार्च को ऑनलाइन दिखा इंस्टाग्राम
परिजनों ने पुलिस की सुस्त कार्रवाई से तंग आकर 9 मार्च 2026 को पुलिस अधीक्षक (SP) हरदोई को एक प्रार्थना पत्र सौंपा। इसमें बेहद गंभीर जानकारी दी गई:
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ऑनलाइन एक्टिविटी: परिजनों के अनुसार, शव मिलने के 18 दिन बाद यानी 6 मार्च 2026 को मृतक के मोबाइल नंबर (9696 741140) से संचालित इंस्टाग्राम अकाउंट ‘ऑनलाइन’ दिखाई दिया।
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परिजनों का सवाल: यदि फोन पुलिस के पास नहीं है और उपकार की मृत्यु हो चुकी है, तो उसका सोशल मीडिया अकाउंट कौन चला रहा है?
पुलिस की भूमिका पर गंभीर आरोप
मृतक के भाई और पिता का आरोप है कि अरवल पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। परिजनों के मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
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FIR में देरी: परिजनों का दावा है कि एफआईआर को अब तक ऑनलाइन दर्ज नहीं किया गया है।
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सबूतों की अनदेखी: मोबाइल फोन चालू होने और डिजिटल लोकेशन मिलने की संभावना के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
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लापरवाही: परिजनों को अंदेशा है कि पुलिस इस मामले में किसी बड़े दबाव के कारण अग्रिम कार्यवाही नहीं कर रही है।
[Representative Image of a Protest by family members or Police Investigation near Ganga Bridge, Hardoi]
न्याय की गुहार
पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि पुलिस मोबाइल की ID और लोकेशन की बारीकी से जांच करे, तो उपकार की मौत का सच सामने आ सकता है। फिलहाल, मोबाइल का ‘ऑनलाइन’ होना इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि फोन किसी ऐसे व्यक्ति के पास है जो इस पूरी घटना से वाकिफ हो सकता है।






