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चित्रकूट से रामेश्वरम में शिव लिंग स्थापना से लंका दहन से लगाय राम राज्याभिषेक तक चली कथा

राजाराम चन्द्र की जयकारे के साथ समाप्त हुआ श्रीराम कथा

जन एक्सप्रेस/ जौनपुर: नगर के रामलीला मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा का समापन भक्ति और उल्लास के साथ हुआ। अंतिम दिन कथावाचक राजन जी महाराज ने लंका दहन से लेकर भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक तक के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

पूरे पंडाल में “जय श्रीराम” के जयकारे गूंजते रहे और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।


 लंका दहन से मिला अधर्म के अंत का संदेश

कथा के दौरान महाराज ने बताया कि हनुमान जी द्वारा लंका दहन अन्याय और अहंकार के विनाश का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर अवतार लेते हैं।

मेघनाद वध और लक्ष्मण शक्ति के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और विश्वास बनाए रखना ही सच्ची भक्ति है।


 संजीवनी बूटी प्रसंग से भावुक हुए श्रद्धालु

जब संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाने का प्रसंग सुनाया गया, तो पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। इस प्रसंग ने भाईचारे, समर्पण और सेवा भाव का संदेश दिया।


 रावण वध: बुराई पर अच्छाई की जीत

कुंभकर्ण वध और रावण वध का वर्णन करते हुए कथावाचक ने कहा कि अधर्म कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में सत्य और धर्म की ही विजय होती है। भगवान श्रीराम द्वारा रावण का वध इसी सत्य का प्रतीक है।


 राम राज्याभिषेक: आदर्श शासन का प्रतीक

कथा के अंतिम चरण में भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने और राज्याभिषेक का भव्य वर्णन किया गया। महाराज ने कहा कि राम राज्य एक आदर्श शासन व्यवस्था का प्रतीक है, जहां सत्य, न्याय और करुणा का वास होता है।


भव्य आरती और प्रसाद वितरण के साथ समापन

कार्यक्रम के समापन पर भव्य आरती उतारी गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। नगर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग कथा श्रवण के लिए पहुंचे।

इस अवसर पर आयोजक श्रीष अग्रहरि, सुमित अग्रहरि, आनंद अग्रहरि, विशाल अग्रहरि, भुवनेश्वर मोदनवाल, सुनील अग्रहरि टप्पू, कृष्णकांत सोनी, राम अवतार अग्रहरि, अश्वनी अग्रहरि, विवेक सोनी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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