सायरन बजते ही पुलिस लाइन में मची भगदड़!

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर जौनपुर जिले में प्रशासन द्वारा युद्ध, एयर स्ट्राइक और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर ब्लैकआउट और मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास जिले की सुरक्षा व्यवस्था, आपसी समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को जांचने के लिए किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन पुलिस लाइन मैदान में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। अभ्यास के दौरान पूरा वातावरण कुछ समय के लिए वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति में तब्दील नजर आया।
मॉक ड्रिल की शुरुआत अचानक बजते एयर स्ट्राइक अलर्ट सायरन से हुई। तेज आवाज के साथ पूरे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसके बाद प्रतीकात्मक रूप से मिसाइलनुमा बम विस्फोट का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिससे मौके पर मौजूद लोग कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए।
सायरन बजते ही आम नागरिकों के बीच सांकेतिक भगदड़ दिखाई गई। इसी दौरान एनसीसी कैडेट्स ने अनुशासन और सूझबूझ का परिचय देते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर पहुंचाने की जिम्मेदारी संभाली। कैडेट्स की तत्परता ने यह संदेश दिया कि संकट की घड़ी में प्रशिक्षित युवा किस प्रकार अहम भूमिका निभा सकते हैं।
ड्रिल के दौरान गंभीर रूप से घायल लोगों का भी प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस एस्कॉर्ट के साथ ग्रीन कॉरिडोर बनाकर घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया। यह अभ्यास यह दर्शाने के लिए था कि वास्तविक आपदा की स्थिति में कैसे कीमती समय बचाया जा सकता है।
वहीं सुरक्षित नागरिकों को पहले से चिह्नित किए गए बंकरनुमा सुरक्षित स्थलों में भेजा गया। पूरे अभ्यास के दौरान पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन और स्वयंसेवी संगठनों के बीच बेहतरीन समन्वय देखने को मिला।
करीब आधे घंटे बाद युद्ध समाप्ति का सांकेतिक सायरन बजाया गया। इसके साथ ही लोगों को यह संदेश दिया गया कि खतरा टल चुका है और वे सुरक्षित रूप से अपने घरों एवं कार्यस्थलों की ओर लौट सकते हैं।
इस अभ्यास के अंतर्गत शाम 6:00 बजे से 6:30 बजे तक पूरे जिले में ब्लैकआउट रखा गया। इस दौरान आम नागरिकों ने भी प्रशासन का पूर्ण सहयोग करते हुए घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों की लाइटें बंद रखीं। जनसहभागिता ने मॉक ड्रिल को और अधिक प्रभावी बना दिया।
मॉक ड्रिल की निगरानी स्वयं जिलाधिकारी दिनेश चन्द्र, सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता, सीओ सदर देवेश सिंह तथा मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) द्वारा की गई। अधिकारी पूरे समय व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते रहे और आवश्यक दिशा-निर्देश देते नजर आए।
इस दौरान एक रोचक और उत्साहवर्धक क्षण भी देखने को मिला, जब जिलाधिकारी दिनेश चन्द्र स्वयं मैदान में उतरे और एक जवान को प्रतीकात्मक रूप से पटखनी देते दिखाई दिए। इस दृश्य ने वहां मौजूद जवानों और कैडेट्स का उत्साह बढ़ा दिया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य किसी भी युद्ध, एयर स्ट्राइक, आतंकी घटना या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में जिले की तत्परता, त्वरित निर्णय क्षमता और आपसी समन्वय को मजबूत करना है।
इस अभ्यास के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आपदा के समय घबराने के बजाय अनुशासन, जागरूकता और सहयोग ही सबसे बड़ा हथियार होता है।







