जान लेने वाली बाघिन मैलानी जंगल से पकड़ी गई, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

जन एक्सप्रेस पूरनपुर (पीलीभीत)। सेहरामऊ क्षेत्र में दो किसानों की जान लेने वाली आदमखोर बाघिन को आखिरकार वन विभाग की संयुक्त टीम ने रविवार रात पकड़ लिया। करीब पांच दिन तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बाघिन को ट्रेंकुलाइज़ कर पिंजड़े में कैद कर लिया गया। बाघिन की गिरफ्तारी से ग्रामीणों में राहत और सुरक्षा की भावना लौटी है।
शाहजहांपुर वन प्रभाग के खुटार रेंज क्षेत्र में पिछले चार महीनों से बाघ और बाघिन का आतंक छाया हुआ था। इन जंगली जानवरों ने दर्जनों मवेशियों को मार डाला, वहीं बीते 11 मई को दुर्जनपुर कलां गांव के किसान हंसराम और 18 मई को चतीपुर गांव के रामप्रसाद को भी बाघिन ने अपना शिकार बना लिया था। लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीण भय और गुस्से में थे। उन्होंने विधायक बाबूराम पासवान से बाघिन को शीघ्र पकड़े जाने की मांग की थी।
शासन से अनुमति मिलने के बाद शाहजहांपुर वन प्रभाग और पीलीभीत टाइगर रिजर्व की संयुक्त टीम को बाघिन को पकड़ने के लिए लगाया गया। रेस्क्यू टीम का नेतृत्व पीटीआर के एक्सपर्ट डॉ. दक्ष गंगवार कर रहे थे, जो बीते मंगलवार से ही क्षेत्र में सक्रिय थे। रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए अन्य अनुभवी वन्यजीव विशेषज्ञों की भी सहायता ली गई।
शनिवार रात बाघिन को पहली बार हरीपुर किशनपुर गांव के पास देखा गया, जहां गन्ने के खेत में ग्रामीणों और रेस्क्यू टीम ने उसे घेरने का प्रयास किया, लेकिन वह चकमा देकर भाग निकली। इसके बाद रविवार रात बाघिन की लोकेशन चतीपुर गांव के पास मैलानी के जंगल में मिली। यहां पिंजड़ा लगाकर उसमें पड्डा बांधा गया था। पड्डे के लालच में बाघिन जैसे ही पिंजड़े के पास पहुंची, टीम ने उस पर नजर रखते हुए उसे ट्रेंकुलाइज़ कर लिया।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि बाघिन का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया है। उसे जल्द ही दुधवा टाइगर रिजर्व भेजा जाएगा। बाघिन के पकड़े जाने से ग्रामीणों ने चैन की सांस ली है और क्षेत्र में अब सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद है।






