महिलाओं ने बरगद वृक्ष का पूजन किया, सुख-समृद्धि की कामना
श्रावण मास की सोमवती अमावस्या पर जिले में रहा उत्साह

जन एक्सप्रेस/संवाददाता
बहराइच। श्रावण मास की सोमवती अमावस्या पर आज जिले की महिलाओं में खासकर उत्साह देखा गया। भोर होते ही महिलाए इष्ट देव का पूजन अर्चन करने के लिए घर से सजधज कर निकल पड़ी है। महिलाओं ने बरगद के वृक्ष की परिक्रमा की और अपने व अपने परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। महिलाओं का जत्था जगह जगह देखा गया। वैसे भी श्रावण मास में सोमवार का अधिक महत्व माना जाता है और लोग जलाभिषेक करने के लिए शिव मंदिरों पर भारी संख्या में जमा होते है।
श्रावण मास में पड़ने के कारण प्रकृति पूजन का यह पर्व चितलगी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन प्रातः काल स्नान के बाद घर से सज-संवर कर महिलाएं बरगद वृक्ष की परिक्रमा के लिए निकल पड़ती है। आम सोमवार को भी गांव, कस्बा, मोहल्ले व शहर में जहां भी बरगद का वृक्ष लगा पाया गया वहां पर भारी संख्या में महिलाए सुबह ही जमा हो गयी। वैसे तो यह सोमवार महिलाओं के लिए काफी खास रहा है। इसलिए की आज चितलगी अमावस्या का पर्व था। जिसके चलते महिलाओं मे पूजन अर्चन को लेकर भारी उत्साह देखा गया। महिलाओं ने बगरद के वृक्ष की 113 बार परिक्रमा की। अपने इष्ट देव को दूध, जल, पुष्प, अक्षत, मिठाई आदि अर्पित किया।
सभी ने परिवार के सुख-समृद्धि का वरदान मांगा। महिलाओं ने अखण्ड सौभाग्यवती होने के साथ परिवार के सुख समृद्धि की कामना की। श्रद्धालु इस दिन विशेष रूप से वट, पीपल, आंवला और तुलसी की पूजा कर इन देव वनस्पतियों से आरोग्य का वरदान मांगती है। शास्त्रों में कहा गया है कि बरगद के पेड़ में त्रिदेव का वास होता है। वहीं आंवले में भगवान श्री लक्ष्मीनारायण, केले में श्री हरि विष्णु, बिल्व में त्रिपुरा सुंदरी, तुलसी में लक्ष्मी तथा वटवृक्ष अर्थात बरगद में देवाधिदेव शिव और शनिदेव का वास होता है।
इसलिए इस दिन इन वृक्ष वनस्पतियों का पूजन का अत्यधिक फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन कुछ विशेष वृक्षों की पूजा करने से गृह दोष दूर होते हैं और सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। बरगद वृक्ष पूजा कर उसकी परिक्रमा लेकर परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। महिलाओं में इस पर्व को लेकर काफी उत्साह रहा और विभिन्न स्थानों पर काफी भीड़ देखी गयी।






