लंपी रोग को लेकर पशुपालन विभाग अलर्ट, गांव-गांव पहुंच रहीं टीमें

जन एक्सप्रेस /रुद्रप्रयाग :- प्रदेश के मैदानी जिलों में गोवंशीय पशुओं में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) के लक्षण सामने आने के बाद रुद्रप्रयाग जिले में भी पशुपालन विभाग ने बचाव और रोकथाम के प्रयास तेज कर दिए हैं। जिले में करीब दो दर्जन टीमें गठित कर गांव-गांव जाकर पशुओं का टीकाकरण करने के साथ ही औषधियां वितरित की जा रही हैं और पशुपालकों को बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
शनिवार को पशु चिकित्सालय रुद्रप्रयाग सचल की टीम ने ग्राम बष्टी में जागरूकता शिविर आयोजित किया। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रचना थपलियाल के नेतृत्व में आयोजित शिविर में करीब 35 पशुपालकों ने भाग लिया। टीम ने पशुपालकों को लंपी रोग के लक्षण, संक्रमण फैलने के कारण, बचाव के उपाय और समय पर टीकाकरण के महत्व की जानकारी दी। इस दौरान करीब 92 पशुओं के लिए आवश्यक औषधियों का वितरण किया गया, जबकि घर-घर जाकर करीब 70 पशुओं का टीकाकरण किया गया।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष रावत ने बताया कि जिले के सभी 16 पशु चिकित्सालयों की ओर से टीमें गठित कर नियमित रूप से जागरूकता एवं टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। स्वस्थ पशुओं को संक्रमण से बचाने के लिए टीकाकरण के साथ पशुपालकों को कीटनाशक, परजीवीनाशक, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली तथा अन्य आवश्यक औषधियां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि शासन के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने जिले की सभी नगर पालिकाओं को अपने-अपने क्षेत्रों में कीटनाशक दवाओं के छिड़काव और फॉगिंग कराने के निर्देश दिए हैं। संबंधित निकायों द्वारा इसके अनुपालन में कार्रवाई की जा रही है।
डॉ. रावत ने पशुपालकों से अपील की कि वे अपने पशुओं को परजीवियों से बचाने के लिए नजदीकी पशु चिकित्सालय से आवश्यक औषधियां प्राप्त करें और समय पर टीकाकरण अवश्य कराएं। उन्होंने बताया कि लंपी स्किन डिजीज मुख्य रूप से गोवंशीय पशुओं को प्रभावित करती है। संक्रमित पशु के संपर्क तथा रोग फैलाने वाले परजीवियों के माध्यम से संक्रमण दूसरे पशुओं तक पहुंच सकता है।
उन्होंने बताया कि अगस्त्यमुनि, रैंतोली, भानाधार और पपड़ासू में करीब 200 निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। इन स्थानों पर भी अभियान के तहत पशुओं का टीकाकरण किया गया है। लंपी संक्रमण के दूसरे चरण में 31 अगस्त से अब तक जिले में 3,367 गोवंशीय पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
जिले में विभाग की सक्रियता और गांव-गांव पहुंच रही टीमें पशुपालकों के लिए राहत की बात हैं। विभाग ने पशुपालकों से किसी भी तरह के असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तत्काल निकटतम पशु चिकित्सालय से संपर्क करने की अपील की है।






