जौनपुरमुरादाबाद

मुरादाबाद के डीआईओएस ऑफिस में भ्रष्टाचार का बम फूटा: “गोली मार दो मुझे” से “जूते मारेंगे” तक पहुँची बहस, वायरल वीडियो ने खोली पोल

जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय जौनपुर के भ्रष्टाचार की कहानी खत्म नहीं की दूसरी कहानी शुरू

जन एक्सप्रेस। लखनऊ

उत्तर प्रदेश में सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जौनपुर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की चर्चित भ्रष्टाचार की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब मुरादाबाद के लेखाधिकारी कार्यालय का नया मामला सामने आ गया है। यहां शिक्षकों के वेतन भुगतान में हो रही अनियमितताओं को लेकर शिक्षक नेताओं और लेखाधिकारी के बीच ज़ोरदार भिड़ंत हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि लेखाधिकारी ने यहां तक कह दिया—”गोली मार दो मुझे”, तो वहीं शिक्षक नेता ने गुस्से में कहा—”हम तुम्हें जूते मारेंगे”। यह पूरा हंगामा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में हुआ, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

वेतन भुगतान में देरी बना जड़

दरअसल, शिक्षक संघ के प्रतिनिधि वेतन भुगतान में हो रही देरी और भ्रष्टाचार को लेकर शिकायत करने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पहुंचे थे। वहां बातचीत की जगह आरोप-प्रत्यारोप और गाली-गलौज शुरू हो गई। शिक्षकों ने लेखाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए कि वह जानबूझकर वेतन में देरी कर रहे हैं और फाइलों को रोककर बैठे हैं।

वीडियो ने खोली पोल, सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति सवालों के घेरे में

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दे रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जब सरकारी अधिकारी ही इस नीति को ठेंगा दिखा रहे हों और शिक्षकों जैसे सम्मानित वर्ग के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हों, तो सवाल उठना लाज़मी है।

क्या ब्यूरोक्रेसी कर रही है सरकार को बदनाम?

लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं ब्यूरोक्रेसी खुद ही सरकार की छवि को नुक़सान पहुँचाने में लगी तो नहीं? थाना, तहसील, ब्लॉक और अब शिक्षा विभाग के दफ्तरों तक में जिस प्रकार भ्रष्टाचार बेलगाम होता जा रहा है, वह दर्शाता है कि व्यवस्था की जड़ें खोखली हो रही हैं।

जनमानस में आक्रोश, नेताओं में नाराजगी

वेतन के लिए संघर्ष कर रहे शिक्षकों के प्रति शासन की बेरुखी ने आम जनता को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। सरकार के मंत्री और विधायक भी इस व्यवस्था से नाराज बताए जा रहे हैं, लेकिन उच्च स्तर पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

बहरहाल यह मामला महज़ एक विवाद नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोलता है। अब यह देखना होगा कि क्या योगी सरकार अपने ही अधिकारियों पर लगाम लगाने का साहस दिखा पाएगी या फिर ऐसे ही घटनाएँ जनता का भरोसा सरकार से उठाती रहेंगी। उत्तर प्रदेश की जनता अब सिर्फ जवाब नहीं, कार्रवाई चाहती है।

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