लोकमाता अहिल्याबाई का प्रशासन अनुकरणीय – कैलाश विजयवर्गीय

जन एक्सप्रेस चित्रकूट। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में लोक माता अहिल्याबाई की 300वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में आयोजित व्याख्यान माला में बोलते हुए कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री, शहरी विकास एवं आवास, म.प्र.शासन ने कहा कि मेरे मन में यह प्रश्न उठता है कि इतिहास में अन्य भारतीय वीरांगानाओं की तरह लोकमाता अहिल्याबाई का नाम प्रसिद्ध क्यों नहीं है? उन्होंने उनके जीवन की चर्चा करते हुए कहा कि वे शिवभक्त थी उनके बचपन में मराठा साम्राज्य के सरदार जो कि उस समय बहुत ताकतवर थे। अहिल्याबाई के गाँव से गुजर रहे थे उनकी सेना की हलचल सुनकर बाकी सब गाॅववासी वहाॅ से भाग गए केवल अहिल्याबाई ही शिव की आराधना करते हुए बैठी रही। मराठा सरदार ने उनका नाम पूछा तो उन्होने बिना डरे कहा कि मेरा नाम अहिल्या है उसी समय मराठा सरदार ने यह निश्चय किया कि इस बेटी को मैं अपनी बहू बनाऊगा। उन्होंने अपने पति को जो कि राजपाट से विमुख थे उन्हें राजपाट की ओर आकर्षित किया। वे भी बहादुर सरदार निकले। पति की मृत्यु के पश्चात् वह सती होने जा रही थी तो उनके ससुर जी ने आदेश दिया कि तुम्हें सती नही होना है राजपाट देखना है। महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उन्होंने दुनियां में पहलीबार केवल महिलाओं की सशक्त और मजबूत सेना बनाई। उन्होंने मानपुर में तोप का कारखाना बनवाया वे कुशल राजनीतिज्ञ एवं कूटनीति में माहिर थी। उन्होंने युद्ध नही किया बल्कि अपनी कूटनीति से ही दूसरे राजाओं को परास्त कर दिया। दुनियां के सारे दुःख जिस महिला के पास हो वह वीरता के साथ राजपाट चलाये यह अनूठी मिशाल है। श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रशासन में सुशासन जानना हो तो लोकमाता अहिल्या से सीखें, न्याय की वे मिशाल थी उनका दरबार आम जनता के चैबीसों घंटे खुला रहता था। उन्होंने गोड़, भील, आदिवासियों को जो कि लूूटपाट करते थे उनको ट्रेनिंग देकर अपनी सेना में शामिल किया। वे सामाजिक सौहार्द की प्रतिमूर्ति थी। उन्होंने महेश्वर में एक घाट बनवाया जहाॅ पर हर जाति का व्यक्ति स्नान कर सकता था। सती प्रथा को बंद करने के लिए उन्होंने अपने राज्य में आदेश जारी कि अब कोई विधवा सती नही होगी और विधवा विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी सहेली का अपने महल में विधवा पुर्नविवाह करवाया। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बनाने के लिए सूरत से कलाकारों को बुलाकर बुनकर महिलाओं को ट्रेनिंग दिलवाई। माहेश्वर की साड़ी इसका उदाहरण है वे कला प्रेमी भी थीं। उनका जीवन सादगीपूर्ण था। इस लिए इन्दौर के राजवाडा को छोड़कर छोटे से महल में रहती थी। उन्होंने विकास के साथ विरासत को बनाए रखा। सबसे पवित्र और सबसे प्रगति शील राज्य देखना हो तो माता अहिल्याबाई का साम्राज्य देखना चाहिए। वे कहती थी धर्म ही राजधर्म है। और राजधर्म ही धर्म है। राजा का कार्य शासन करना नही बल्कि सेवा करना है। जिस राजा के राज्य में प्रजा दुःखी हो उसका राज्य करने का अधिकार नही है। हर वर्ग का व्यक्ति माता अहिल्या के जीवन से कुछ न कुछ सीख सकता है यह बात श्री कैलाश विजयवर्गीय ने बाल्मीकि सभागार में मुख्य अतिथि के रूप में कही। विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए अभय महाजन संगठन सचिव, दीनदयाल शोध संस्थान ने कहा कि पुण्य श्लोंका अहिल्याबाई का जीवन अनुरणीय है।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भरत मिश्र ने कहा कि उन्होंने धार्मिक स्थलों के पुनर्निमाण, नदी-घाटों के जीर्णोद्धार, ध्र्मशालाओं के निर्माण और सड़को, कुओं व तालाबों के निर्माण के माध्यम से न केवल तत्कालीन समाज की जरूरतें पूरी कीं, बल्कि भविष्य को भी दिशा दी। आज जब हम महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करते हैं, तो अहिल्याबाई का जीवन उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे एक नारी, अपनी सेवा, श्रम और ममता से एक समूचे राज्य को एक परिवार की तरह चला सकती है। आज के समय में जब शासन-प्रशासन, राजनीति और समाज में नैतिक मूल्यों का संकट देखा जाता है, तब अहिल्याबाई का जीवन हमारेे लिए एक दीपस्तंभ है। हमें उनके विचारों और कार्यो को अनुसरण में लाना होगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के शहरी विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी जी, म.प्र.जन अभियान परिषद के उपाध्याक्ष मोहन नागर , चित्रकूट के विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार, रामपुर बघेलान के विधायक विवेक विक्रम सिंह, भारतीय जनता पार्टी सतना के जिलाध्यक्ष भगवती प्रसाद पाण्डेय , सतना के महापौर योगेश ताम्रकार सहित सतना एवं चित्रकूट के गणमान्य नागरिक, विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।कार्यक्रम शुभारभ दीप प्रवज्जलन के साथ माँ सरस्वती एवं लोकमाता अहिल्याबाई के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम का संयोजन डाॅ. नीलम चैरे एवं मुख्य संयोजक प्रो. अमरजीत सिंह रहे। धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय की कुलसचिव नीरजा नामदेव ने किया।विश्वविद्यालय में लोकमाता अहिल्याबाई के चित्रों की प्रदर्शनी का मंत्री एवं अतिथियों नेे अवलोकन किया एवं सराहना की।






