महोबा में फोर लेन सड़क निर्माण शुरू, बिना भूमि पूजन के ही चला बुलडोजर

जन एक्सप्रेस/महोबा: महोबा शहर में लंबे समय से प्रतीक्षित फोर लेन मॉडल सड़क परियोजना का काम आखिरकार शुरू हो गया है। खास बात यह है कि इस बार पारंपरिक भूमि पूजन और नारियल फोड़ने की औपचारिकता से पहले ही ठेकेदार ने सीधे मौके पर बुलडोजर लगाकर कार्य का शुभारंभ कर दिया।
यह सड़क परमाआनंद चौक से झलकारी बाई तिराहा तक प्रस्तावित है, जो शहर के व्यस्ततम मार्गों में से एक मानी जाती है। इस मार्ग के चौड़ीकरण की मांग काफी समय से स्थानीय लोगों द्वारा उठाई जा रही थी।
हालांकि परियोजना की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन अभी भी कुछ जरूरी तैयारियां अधूरी हैं। विशेष रूप से बिजली विभाग द्वारा पोल शिफ्टिंग का कार्य अभी तक शुरू नहीं किया गया है, जो आगे चलकर निर्माण कार्य की गति को प्रभावित कर सकता है। इसके बावजूद काम की शुरुआत से लोगों में उम्मीद जगी है कि अब यह परियोजना जल्द ही जमीन पर पूरी होती दिखाई देगी।
यह सड़क क्षेत्र के सदर विधायक राकेश गोस्वामी की प्रतिष्ठा से भी जुड़ी हुई मानी जा रही है। ऐसे में इस परियोजना की प्रगति पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर खास नजर रखी जा रही है।
स्थानीय नागरिकों में इस विकास कार्य को लेकर उत्साह का माहौल है। लोगों का कहना है कि सड़क चौड़ी होने से शहर में लगने वाले जाम से राहत मिलेगी और यातायात व्यवस्था अधिक सुगम हो जाएगी। खासकर बाजार क्षेत्र और मुख्य चौराहों पर रोजाना होने वाली भीड़भाड़ में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
इसके अलावा, इस परियोजना से शहर के विकास को भी नई दिशा मिलने की संभावना है। बेहतर सड़क सुविधा से न केवल आम नागरिकों को लाभ होगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माण कार्य कितनी तेजी और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाएगा। अक्सर देखा गया है कि परियोजनाएं शुरू तो हो जाती हैं, लेकिन अधूरी तैयारियों या प्रशासनिक अड़चनों के चलते उनकी गति धीमी पड़ जाती है।
फिलहाल, बिना भूमि पूजन के सीधे काम शुरू होने को लेकर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे विकास के प्रति गंभीरता के संकेत के रूप में देख रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे जल्दबाजी भी मान रहे हैं।
अब सभी की निगाहें इस परियोजना की प्रगति पर टिकी हैं। यदि यह कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा होता है, तो यह महोबा शहर के बुनियादी ढांचे में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।






