
जन एक्सप्रेस /उत्तरकाशी :- उत्तरकाशी जनपद के भंकोली गांव के निवासी और जिले के प्रथम पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी स्वर्गीय चंद्र सिंह का निधन हो गया। उनके निधन से पूरे जनपद में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रशासनिक सेवा में ईमानदारी, सादगी और जनसेवा के लिए उनकी पहचान एक आदर्श अधिकारी के रूप में रही।
बताया जाता है कि लगभग वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौर में उनका जन्म हुआ। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। उत्तरकाशी के पर्यावरणविद् एवं समाजसेवी सुरेश भाई के अनुसार, उच्च शिक्षा के दौरान उनकी मुलाकात प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा से हुई, जिसने उनके जीवन की दिशा तय कर दी।
जब सुंदरलाल बहुगुणा ने टिहरी में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए ठक्कर बापा छात्रावास की स्थापना की, तब चंद्र सिंह वहां पहुंचे। छात्रावास में उनके साथ पूर्व पर्वतीय विकास मंत्री स्वर्गीय बर्फियाल जुवांठा और समाज सुधारक स्वर्गीय बिहारी लाल भी रहे। यह संगत आगे चलकर समाज और उत्तराखंड के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली साबित हुई।
चंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश और बाद में उत्तराखंड में जिलाधिकारी सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर सेवाएं दीं। उनका प्रशासनिक जीवन पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनहित के प्रति समर्पण का उदाहरण माना जाता है। उनका मानना था कि सरकार की सफलता योजनाओं की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा या नहीं।
उत्तरकाशी के लोगों के लिए चंद्र सिंह केवल जिले के प्रथम पूर्व IAS अधिकारी नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसी प्रेरणा थे जिन्होंने यह साबित किया कि ईमानदारी और सिद्धांतों से समझौता किए बिना भी प्रभावी प्रशासन दिया जा सकता है। उनके कार्य और जनसेवा के प्रति समर्पण को आज भी प्रशासनिक गलियारों में सम्मान के साथ याद किया जाता है।
उनके निधन पर क्षेत्र के लोगों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पहाड़ ने एक कर्मठ प्रशासक, सच्चा समाजसेवी और मार्गदर्शक खो दिया है। उनका जीवन संघर्ष, सेवा, सादगी और उत्कृष्ट प्रशासनिक मूल्यों का प्रतीक रहेगा तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।






