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एनएच-74 घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई

सीतापुर में पीसीएस अधिकारी और परिजनों के ठिकानों पर 14 घंटे छापेमारी, मनी लॉन्ड्रिंग के अहम सुराग जुटाए

जन  एक्सप्रेस/सीतापुर: राष्ट्रीय राजमार्ग-74 (एनएच -74) चौड़ीकरण घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी ) ने गुरुवार को सीतापुर जिले में बड़ा शिकंजा कसा। यह कार्रवाई सुबह से लेकर देर रात तक करीब 14 घंटे तक चली, जिसमें ईडी की आठ गाड़ियों का काफिला महोली कोतवाली क्षेत्र के ग्राम भुड़िया और बद्दापुर स्थित ठिकानों पर पहुंचा।
इस दौरान ईडी टीम ने उत्तर प्रदेश के पीसीएस अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह, उनके भाई व ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजेश सिंह और व्यापारी नरेंद्र प्रताप सिंह के आवासों पर एक साथ दबिश दी। छापेमारी के दौरान परिवार के सभी सदस्यों को घर के अंदर ही रोक दिया गया। किसी को बाहर जाने या किसी से संपर्क करने की इजाजत नहीं दी गई।

ट्रांसपोर्ट कारोबार से जोड़ मनी लॉन्ड्रिंग का संदेह
सूत्रों के मुताबिक, नरेंद्र प्रताप सिंह और राजेश सिंह देहरादून स्थित डोईवाला चीनी मिल से जुड़े ट्रांसपोर्ट कारोबार में सक्रिय हैं, जबकि दिनेश प्रताप सिंह इसी मिल में कार्यकारी निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। ईडी को आशंका है कि एनएच-74 परियोजना में हुए करोड़ों के घोटाले से अर्जित काले धन को इन्हीं कारोबारों में निवेश किया गया।
महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त
ईडी अधिकारियों ने दिन भर की तलाशी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डेटा, लेनदेन रसीदें, प्रॉपर्टी कागजात और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। जांच एजेंसी ने कहा है कि इन सामग्रियों की गहन जांच की जाएगी और आगे की पूछताछ इन्हीं के आधार पर की जाएगी।
स्थानीय स्तर पर हड़कंप, भीड़ जुटी
जैसे ही छापेमारी की सूचना स्थानीय लोगों को मिली, इलाके में हड़कंप मच गया। गांवों में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तैनात रहना पड़ा।

पृष्ठभूमि: करोड़ों के घोटाले से हिला था सिस्टम

गौरतलब है कि वर्ष 2017 में एनएच-74 चौड़ीकरण के दौरान हुए मुआवजा वितरण और भूमि अधिग्रहण में सैकड़ों करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था। इस मामले में सरकारी अधिकारियों, बिचौलियों और प्राइवेट कारोबारियों की मिलीभगत के साक्ष्य मिले थे।
ईडी अब इस घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के रूट्स को ट्रैक कर रही है। एजेंसी के अनुसार, जांच प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में और भी कार्रवाई संभावित है।

संपर्क सूत्रों की मानें तो यह मामला उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के कई उच्च पदस्थ अधिकारियों तक जा सकता है,जिससे ब्यूरोक्रेसी और सत्ता तंत्र में हलचल तेज होने की आशंका है।
ईडी का कहना है कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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