लोकायुक्त की नोटिस से बेनकाब हुआ टॉप सीक्रेट का सच
भगोड़े से संबंधों पर घिरे योगी के पूर्व मीडिया सलाहकार मृत्युंजय सिंह

जन एक्सप्रेस/लखनऊ : टॉप सीक्रेट की एक अहम ख़बर ने जो सच्चाई उजागर की थी, अब वही मुद्दा योगी सरकार के पूर्व मीडिया सलाहकार मृत्युंजय सिंह के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। लोकायुक्त ने उन्हें रेड कॉर्नर नोटिस वाले भगोड़े राशिद नसीम से संदिग्ध लेन-देन के मामले में बिंदुवार जवाब देने का नोटिस भेजा है।
यह नोटिस पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की शिकायत और खुलासों के आधार पर जारी हुआ है, जिनकी चिट्ठी में गंभीर आरोप दर्ज थे। जब ये ख़बर सामने आई थी, मृत्युंजय सिंह सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार पद पर थे। मामले के तूल पकड़ते ही उन्हें पद से हटा दिया गया — यानि इस्तीफा दिलवाया गया।
लेकिन असली सवाल अब उठता है…
• इस्तीफे के बावजूद मृत्युंजय सिंह लोकभवन में दफ्तर कैसे चला रहे हैं?
• उनकी नेम प्लेट अब तक कैसे चस्पा है?
• वो सरकारी बंगला और गाड़ी अब तक कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं?
• क्या ये सब सरकारी आदेश से चल रहा है, या किसी ‘सिस्टम’ की रहनुमाई में?
लोकायुक्त की कार्रवाई, लेकिन ‘लोकभवन’ में कोई रोक नहीं
माना जा रहा है कि ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों ही राशिद नसीम की कंपनियों और नेटवर्क की जांच में लगे हैं। खुद विदेश मंत्रालय उसके प्रत्यर्पण की तैयारी कर रहा है। इस बीच, इस भगोड़े से जुड़े लेनदेन के आरोप मृत्युंजय सिंह तक पहुंच चुके हैं, फिर भी उनका लोकभवन में बेखटके आना-जाना और “अघोषित पदाधिकारी” की तरह बैठना — कई बड़े सवाल खड़े करता है।
“ज़ीरो टॉलरेंस” की सरकार या “साइलेंट सपोर्ट” का सिस्टम?
उत्तर प्रदेश में ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति के दावे अक्सर सुर्खियां बटोरते हैं। लेकिन जब ऐसे गंभीर आरोपों के बावजूद एक पूर्व अधिकारी को VIP सुविधा मिलती रहे, तो सरकार की नीयत पर भी सवाल उठते हैं।
प्रमुख सचिव संजय प्रसाद की चुप्पी भी अब शक के घेरे में है। आखिर क्यों अब तक मृत्युंजय सिंह के इस्तीफे की आधिकारिक घोषणा तक नहीं की गई? क्या दिल्ली दरबार इस पूरे मामले से वाक़िफ़ है?
मीडिया की चुप्पी और मित्र मंडली का सम्मान
ग़ौरतलब है कि कुछ पत्रकार, जिनके परिवारजनों का हालचाल लेने मृत्युंजय सिंह अस्पताल पहुंचे थे, आज भी उन्हें “मीडिया एडवाइजर” कहकर संबोधित कर रहे हैं। आखिर क्यों? क्या यह दोस्ती के नाम पर सच्चाई पर परदा डालने की कोशिश है?
पूछता है जन एक्सप्रेस
- कौन है मृत्युंजय सिंह के पीछे खड़ा ‘सिस्टम’?
- क्या एक भगोड़े के साथ संदिग्ध संबंधों के बावजूद किसी को ‘प्रोटेक्शन’ मिल सकता है?
- क्या जनता को जवाब मिलेगा, या फिर ये भी एक फाइल बनकर बंद हो जाएगा?
जन एक्सप्रेस : इस पूरे मामले की तह तक जाएगा। क्योंकि ये सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, सिस्टम की पारदर्शिता का है।






