गोद में भविष्य की जिम्मेदारी: डॉ. तनुषा ने बढ़ाया ममता का हाथ
कुपोषण के खिलाफ जंग में प्रशासन की पहल, 80 सैम बच्चों को वितरित की गई पोषण किटें

जन एक्सप्रेस चित्रकूट/मानिकपुर (हेमनारायण द्विवेदी):“संभव अभियान 5.0” और “राष्ट्रीय पोषण माह 2025” के अंतर्गत आज विकासखंड सभागार मानिकपुर में एक अत्यंत संवेदनशील और सामाजिक सरोकार से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया।
आकांक्षा समिति की अध्यक्षा डॉ. तनुषा टी.आर. ने स्वयं एक बच्चे को गोद में लेकर सैम श्रेणी (गंभीर रूप से कुपोषित) बच्चों की जिम्मेदारी को अपनाने का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में मानिकपुर के विभिन्न ग्रामों से आए 80 सैम बच्चों को पोषण किट एवं उपहार वितरित किए गए।
सिर्फ शब्द नहीं, कार्य से दिखाया ममत्व
कार्यक्रम की शुरुआत में जानकारी दी गई कि गांवों में कैंप लगाकर बच्चों की लंबाई और वजन की जांच कर उन्हें सैम से मैम और फिर सामान्य श्रेणी में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में चिन्हित सैम बच्चों को आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवाएं, पोषण शिक्षा एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के माध्यम से देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है।
पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर संवाद
डॉ. तनुषा टी.आर. ने माताओं से खुले संवाद के माध्यम से पोषण, बीमारियों से बचाव, स्वच्छता, शिशु आहार, और मातृत्व देखभाल के विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि एक घंटे के भीतर शिशु को कोलेस्ट्रम फीडिंग, 6 माह तक केवल माँ का दूध, और उसके बाद घरेलू पोषक आहार देने की आवश्यकता है।
हरे पत्तेदार सब्जियों, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों और सहजन के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया।
सरकारी योजनाओं की दी विस्तृत जानकारी
कन्या सुमंगला योजना: बालिका के जन्म से स्नातक तक ₹25,000 ,प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना: पहले बच्चे पर ₹5,000, दूसरी बालिका पर ₹6,000 ,एनआरसी भर्ती/डिस्चार्ज पर ₹700, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को भर्ती पर ₹200 प्रोत्साहन ,फॉलोअप पर नकद प्रोत्साहन, हर 15 दिन पर 4 बार निगरानी अनिवार्य
जरूरी है समय पर पंजीकरण और चिकित्सकीय परामर्श
डॉ. तनुषा ने बताया कि गर्भवती महिलाएं प्रथम तिमाही में ही एएनएम या आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकरण कराएं और आयरन, कैल्शियम का सेवन केवल डॉक्टर की सलाह पर करें। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही कुपोषण के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।
अधिकारियों की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी पी.डी. विश्वकर्मा, उपजिलाधिकारी मानिकपुर, खंड विकास अधिकारी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, मुख्य सेविका, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियाँ, ग्रामीण महिलाएं एवं प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
“मां की गोद में सुरक्षित बचपन, कुपोषण से मुक्त भविष्य की ओर”
यह कार्यक्रम न केवल सरकारी प्रयासों की सफलता का उदाहरण था, बल्कि सामाजिक दायित्व और मातृत्व की जीवंत मिसाल भी बना।
डॉ. तनुषा द्वारा बच्चे को गोद में लेकर दी गई प्रेरणा ने सभी उपस्थित लोगों को भावनात्मक रूप से भी जोड़ा और यह संदेश दिया कि समाज तभी आगे बढ़ेगा जब उसका बचपन स्वस्थ और सुरक्षित होगा।






