उत्तर प्रदेशबांदाराज्य खबरें

संस्कृत महाविद्यालय साथी में भर्ती पर सवाल, अवैध नियुक्तियों के आरोप से मचा हड़कंप

जन एक्सप्रेस  /बांदा: जनपद बांदा के शिव प्रसन्न संस्कृत महाविद्यालय साथी में चल रही भर्ती प्रक्रिया इन दिनों गंभीर विवादों में घिर गई है। महाविद्यालय में साहित्य और व्याकरण विषयों के लिए हो रहे साक्षात्कारों को लेकर अभ्यर्थियों ने खुले तौर पर अवैध नियुक्तियों का आरोप लगाया है। लगातार दूसरे दिन भी कथित दलालों की सक्रियता की चर्चाएं सामने आने से पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि महाविद्यालय में 23 और 24 जनवरी को आयोजित किए जा रहे इंटरव्यू पूरी तरह नियमविरुद्ध हैं और इन्हें केवल औपचारिकता के तौर पर कराया जा रहा है। आरोप है कि वास्तविक चयन प्रक्रिया पहले ही बंद कमरों में पूरी कर ली गई है।

लाखों रुपये लेकर तय किए गए चयन का आरोप

शिकायतकर्ता राजेन्द्र कुमार सहित कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि महाविद्यालय प्रबंधन ने विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ अधिकारियों और बाहरी लोगों के साथ मिलकर कथित रूप से 35 से 40 लाख रुपये प्रति पद की डील तय की है। आरोप है कि चयन पहले ही पैसों के आधार पर तय कर लिया गया है और इंटरव्यू केवल दिखावे के लिए कराए जा रहे हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि जो उम्मीदवार आर्थिक रूप से सक्षम हैं, उन्हें पहले ही चयन का भरोसा दिला दिया गया है, जबकि योग्य लेकिन सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय स्तर तक मिलीभगत का आरोप

शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि इस कथित भर्ती घोटाले में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से जुड़े कुछ वरिष्ठ अधिकारी और प्रोफेसर भी शामिल हैं। आरोपों के अनुसार कुल सचिव सहित कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग इस पूरी प्रक्रिया को संरक्षण दे रहे हैं।

अभ्यर्थियों का दावा है कि विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों की संलिप्तता के कारण ही अब तक इस भर्ती प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई गई है, जबकि नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है।

चयन सूची पहले से तय होने का दावा

शिकायतकर्ताओं ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि चयनित अभ्यर्थियों के नाम इंटरव्यू से पहले ही तय कर लिए गए हैं।
23 जनवरी को—

  • प्रवक्ता साहित्य पद पर सूरज शुक्ला

  • शिक्षक साहित्य पद पर अनुज कुमार मिश्र

और 24 जनवरी को—

  • प्रवक्ता पद पर अभिषेक अवस्थी एवं अमित कुमार तिवारी

  • सहायक प्रवक्ता व्याकरण पद पर ज्ञानेश्वर मिश्र

  • शिक्षक व्याकरण पद पर अतुल कुमार पाण्डेय एवं ताराचंद

के चयन की जानकारी पहले से होने का दावा किया गया है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि जब चयन प्रक्रिया से पहले ही नाम सार्वजनिक हो जाएं, तो पूरी भर्ती की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

नियमों की अनदेखी का भी आरोप

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि एक ही व्यक्ति को अलग-अलग पदों पर चयनित किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जो विश्वविद्यालय और शासन दोनों के नियमों के खिलाफ है।

इसके अलावा 30 जनवरी को सहायक प्रवक्ता आधुनिक हिन्दी पद पर सत्यम नामक अभ्यर्थी के चयन की पूर्व जानकारी सामने आने को भी शिकायतकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल बताया है।

सीएम, राज्यपाल और कुलपति को भेजी गई शिकायत

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल, जिलाधिकारी बांदा और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के कुलपति को लिखित शिकायत पत्र भेजा है।

शिकायत में मांग की गई है कि—

  • भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए

  • पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए

  • दोषी अधिकारियों व प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला प्रदेश के संस्कृत शिक्षा तंत्र की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर देगा।

डीएम से हस्तक्षेप की मांग

अभ्यर्थियों ने विशेष रूप से जिलाधिकारी बांदा से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि जिला प्रशासन समय रहते भर्ती प्रक्रिया को नहीं रोकता है, तो योग्य उम्मीदवारों के साथ बड़ा अन्याय होगा।

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे आगे कानूनी कार्रवाई और आंदोलन का रास्ता भी अपनाने को मजबूर होंगे।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण ने संस्कृत शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो भविष्य में शिक्षा संस्थानों पर आमजन का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन और विश्वविद्यालय के रुख पर टिकी हैं कि क्या इस कथित अवैध भर्ती प्रक्रिया पर समय रहते रोक लगाई जाएगी या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button