स्लीपर बसों में अवैध लगेज और बिना मानकों के दौड़ रही बसें, आखिर कब होगी कार्रवाई?
प्राइवेट बसों का तांडव जारी, रोडवेज को करोड़ों का नुकसान!

जन एक्सप्रेस/लखनऊ। (हेमनारायण हेमू):उत्तर प्रदेश में एक तरफ सरकार रोडवेज व्यवस्था को मजबूत करने और यात्रियों को सुरक्षित सफर देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजधानी लखनऊ में प्राइवेट बसों का अवैध कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। हालत यह है कि लखनऊ के नहरिया क्षेत्र से दिल्ली, बिहार समेत कई शहरों के लिए दर्जनों प्राइवेट बसें रोजाना दौड़ रही हैं, जिनमें से अधिकांश बसें सुरक्षा मानकों को भी पूरा नहीं कर रही हैं।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन बसों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? कई बार स्लीपर बसों में आग लगने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें यात्रियों की जान तक खतरे में पड़ चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन और परिवहन विभाग की आंखें बंद हैं।सूत्रों की मानें तो दिल्ली से लखनऊ, बिहार और अन्य शहरों तक चलने वाली कई बसों में यात्रियों के साथ भारी मात्रा में लगेज और सामान भी ढोया जाता है। बसों की छतों पर अवैध तरीके से सामान लादकर लाया जाता है, जिनका न तो कोई जीएसटी बिल होता है और न ही कोई वैध दस्तावेज। इससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है।
इतना ही नहीं, सूत्रों के अनुसार कई बसों के जरिए संदिग्ध और अवैध सामान की ढुलाई भी की जाती है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे टोल प्लाजा पर अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद ये बसें आसानी से निकल जाती हैं। चर्चा है कि मोटी रकम लेकर इन बसों को बिना जांच के जाने दिया जाता है। आखिरकार बसों की छतों पर लदा भारी सामान अधिकारियों को क्यों नहीं दिखाई देता?
प्राइवेट बसों की मनमानी से उत्तर प्रदेश रोडवेज को भी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। जहां रोडवेज बसें नियमों के दायरे में रहकर संचालन करती हैं, वहीं प्राइवेट बस संचालक खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा भी भगवान भरोसे है।
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर परिवहन विभाग, प्रशासन और संबंधित अधिकारी कब जागेंगे? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होगी या फिर इसी तरह अवैध बसों का खेल चलता रहेगा?






